महायज्ञ में भगवान के धरती पर अवतरण की मार्मिक कथा
प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। अपने आसपास के मंदिरों में जाकर श्रद्धालू भगवान से अपनी आवश्यकता की चीजें मांग तो लेते हैं, पर वे जीवन के लक्ष्य से भटक जाते हैं। यदि भगवान से कुछ मांगने के बदले हम भगवान को ही मांग लें तो जीवन धन्य हो जाएगा।
जैसे महराजा मनु व महारानी सदरूपा ने भगवान से उनके जैसा पुत्र मांगा था। पूर्व जन्म के वही महराजा मनु द्वापर में राजा दशरथ थे। श्रीरामचरित मानस में वर्णित इस कथा का सविस्तार व्याख्यान कर रहे थे पावन तीर्थस्थल वाराणसी से पधारे मानस मार्तंड अच्युतानंद पाठकजी महराज, जो बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के अंगवाली ग्राम स्थित धर्मसंस्थान मैथान टुंगरी में आयोजित श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के 29वें अधिवेशन के प्रथम 9 मार्च को रात्रि प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने धरती पर भगवान श्रीराम के अवतरण के कारण को उपस्थित श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया। कहा कि ईश्वर भाव के भूखे होते हैं। अंतरात्मा से यदि उन्हें ध्यान किया जाए तो भगवान अपने भक्तों के अधीन हो जाते हैं। मानस मार्तंड ने पूर्व की रानी सदरूपा, जो इस जन्म में महारानी कौशल्या बनी है, जो प्रभु श्रीराम रूपी पुत्र की माता बनी है। इस कथा की बेवाक विश्लेषण उन्होंने किया। बताया कि श्रीराम की जन्म के पूर्व रावण का जन्म हुआ था। एक प्रजा की बातों से राजा दशरथ को पुत्र न होने की ग्लानि हुई थी।उनकी इस व्यथा को परमसत्ता ईश्वर को उनके यहां अवतरण लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि मनुष्य भगवान के लिए एक बूंद आंसू बहाएगा तो वे जीवन भर उनके लिए आसू बहाएंगे।
व्यास अनिल पाठक वाचस्पति वाराणसी से पधारी मानस कोकिला नीलम शास्त्री ने धनुष यज्ञ सहित कई प्रसंगों की व्याख्यान की। व्यास मंच पर संस्थापक गौरबाबा, बिपिन कुमार पांडेय, अमित पाठक, अशोक मिश्र, सतीश मिश्र, राजेश पंडित सहित अन्य उपस्थित थे।
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