Advertisement

शीतकालीन सत्र में चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित नही किए गए तो गंभीर परिणाम-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू हो रहा है। अगर इस सत्र में झारखंड के चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित नही किए गए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

उक्त कड़ी चेतावनी 30 नवंबर को आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह हमारी अंतिम शांतिपूर्ण अपील है। न्याय मिला तो ठीक, वरना झारखंडी समाज एक साथ सड़क पर उतरकर इतिहास का एक नया अध्याय लिखेगा।

चार प्रमुख मांग जिन पर केंद्र की चुप्पी को नायक ने खुला विश्वासघात करार दिया है उनमें कोल बेयरिंग एरियाज अमेंडमेंट बिल 2024 पर तत्काल रोक। कहा कि बिना झारखंड सरकार की लिखित सहमति और ग्राम सभा की मुहर के एक इंच कोल ब्लॉक आगे नहीं बढ़ने देंगे। कोल इंडिया को 50-100 साल की लीज देने का खेल बंद हो। मेसा (एमईएसए) बिल में जरूरी संशोधन कर तुरंत पारित करो।

अनुसूचित क्षेत्रों में शहर बने या नहीं, फैसला ग्राम सभा का होगा। दस साल से फाइल घूम रही है। झारखंड विशेष पुनर्गठन पैकेज और खनिज राजस्व में उचित हिस्सा यथा कोयला, लोहा, यूरेनियम लूटकर दिल्ली ले गए, बदले में हमें विस्थापन, गरीबी और प्रदूषण मिला। अब हिसाब चुकता करो। न्यूनतम 50,000 करोड़ का विशेष पैकेज और खनिज राजस्व का बड़ा हिस्सा इसी सत्र में घोषित हो तथा पेसा बिल को हू-ब-हू केन्द्र सख्ती से देश के सभी राज्यों मे लागु कराए।

नायक ने राज्य के 14 लोकसभा और 6 राज्यसभा सांसदों को सीधी चुनौती देते हुए से सवाल किया कि वे लोकसभा तथा राजयसभा में किसके प्रतिनिधि हैं? अपनी पार्टी के गुलाम या झारखंड की 4 करोड़ जनता के? इस सत्र में आपका स्टैंड तय करेगा कि इतिहास आपको गर्व से याद करेग या शर्म से? नायक ने दृढ़ स्वर में कहा कि वे हिंसा नहीं चाहते। वे सिर्फ अपना हक चाहते हैं। अगर हक न मिला तो पूरा झारखंड एक साथ खड़ा हो जाएगा। यह हमारा वचन है।
ज्ञात हो कि, आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच ने सभी मीडिया संस्थानों से अनुरोध किया है कि इस इसे प्रमुखता से प्रकाशित/प्रसारित करें, ताकि देश की राजधानी दिल्ली तक झारखंड की यह अंतिम शांतिपूर्ण पुकार ज़ोरदार तरीके से पहुँच सके।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *