सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में गुवा स्थित सेल प्रबंधन के खिलाफ संयुक्त यूनियनों ने 16 अक्टूबर शाम 4:30 बजे जनरल ऑफिस के समक्ष संयुक्त यूनियन मोर्चा द्वारा जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित यूनियन नेताओं ने प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आगामी 25 अक्टूबर को गुवा सेल में आर्थिक नाकाबंदी की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान संयुक्त यूनियनों के नेताओं ने कहा कि गुवा सेल प्रबंधन लगातार मजदूरों और यूनियनों को झूठे आश्वासन देकर भ्रमित कर रही है। अब की लड़ाई आर या पार की होगी, जिसमें मजदूरों के साथ सारंडा क्षेत्र के ग्रामीण भी शामिल होंगे। यूनियन नेताओं ने कहा कि वे व्यापक जन आंदोलन कर सेल प्रबंधन को गुवा से उखाड़ फेंकेंगे।
यूनियनों की प्रमुख मांगों में गुवा सेल में 19 बाहरी कामगारों की प्रस्तावित बहाली रद्द कर स्थानीय रहिवासियों को रोजगार का अवसर दिया जाए। सफाई कर्मियों का विस्तारीकरण किया जाए तथा जिन विभागों में रविवारीय कार्य बंद है, उन्हें पुनः शुरू किया जाए। ठेका मजदूरों की वार्षिक छुट्टी 5 दिन से बढ़ाकर 10 दिन की जाए। रात्रि भत्ता 45 रुपए से बढ़ाकर 90 रुपए किया जाए। फाइन्स डिस्पैच माह में मिलने वाली राशि 1000 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए की जाए। जिन ठेका कर्मियों ने अपने आश्रितों को काम सौंप दिया है, उनके आवास उनके आश्रितों के नाम आवंटित किए जाए।
कुशलता आधारित अपग्रेडेशन (अकुशल से अर्धकुशल, अर्धकुशल से कुशल) शीघ्र किया जाए। जिन ठेका कर्मियों को रिट्रेंचमेंट बेनिफिट, एडब्ल्यूए राशि और मेडिकल बुक नहीं मिली है, उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जाए।लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान शीघ्र किया जाए। पेंशन भुगतान 58 वर्ष की आयु से लागू किया जाए तथा सेवानिवृत्त कर्मियों का लंबित पीएफ व ग्रेचुएटी भुगतान किया जाए। रेफरल चिकित्सा यात्रा भत्ता का भी भुगतान किया जाए।
सेल प्रबंधन को दिए गये पत्र में यह भी कहा गया है कि 11 जुलाई 2024 को पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा और यूनियन प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुई बैठक में प्रबंधन ने भरोसा दिया था कि बाहरी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से बंद होगी। बावजूद इसके प्रबंधन ने इसे दोहराने की कोशिश की, जिसका संघ ने कड़ा विरोध किया है।
उक्त प्रदर्शन में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक), सीटू, झारखंड मजदूर मोर्चा यूनियन सहित कई जनप्रतिनिधि, पांच गांवों के मुंडा-मानकी, ग्रामीण एवं बड़ी संख्या में मजदूर शामिल हुए।
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