हिन्दू समाज का सच्चा व सहोदर पर्व है होली-संत मौनी बाबा

अवध किशोर शर्मा/सोनपुर (सारण)। बिहार प्रदेश उदासीन महामंडल समिति के प्रदेश अध्यक्ष संत बाबा विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने बीते 8 मार्च को सारण जिला के हद में सोनपुर में कहा कि सदियों से होली पर्व ने समग्र हिन्दू समाज को एकजुट रखा है।

मौनी बाबा ने कहा कि होली पर्व सनातन हिन्दू समाज का सच्चा संरक्षक व सहोदर पर्व है। इस पर्व ने समाज में व्याप्त जात-पात, छुआ-छूत जैसी कुरीतियों को नियंत्रण कर सनातन हिन्दू धर्म को मजबूत करने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि सदियों से यह समाज के सभी तबके के लोगों को एक साथ मिलकर रहने की प्रेरणा देता रहा है। एक दूसरे के निकट लाने में इस पर्व की भूमिका को कभी नजरअंदाज नही किया जा सकता। सच्चे अर्थों में यह हिन्दू सनातन धर्म का रक्षक पर्व है।

इसे इसी तरह मिलजुलकर मनाते रहने की जरुरत है।
मौनी बाबा ने कहा कि आज संसार भी होली जैसे पर्व-त्योहारों की वजह से ही हिंदुस्तानी सनातनी हिन्दू धर्म-संस्कृति का लोहा मानता है।

प्रदेश अध्यक्ष संत मौनी बाबा ने यहां अपने राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बिहार के सोनपुर स्थित शास्त्रीय नृत्य, संगीत, वाद्य, सेवा, सत्संग के लिए समर्पित उदासीन महामंडल प्रबंध समिति बिहार के प्रधान कार्यालय लोकसेवा आश्रम में होली मिलन महोत्सव को संबोधित करते हुए उपरोक्त बातें कहीं।

खास बात यह रही कि आश्रम में आने वाले होली गायकों की आने वाली हर टोली में बाबा संत विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा उपस्थित रहे और गायकों की टोली में शामिल लोक गायकों को अपना आशीर्वचन दिया। उन्होंने स्वयं भी झूम-झूमकर होली गायन भी किया।उन्होंने होली को विश्व के समस्त सनातनी हिंदुओं के लिए सद्भावना का पर्व बताया।

उन्होंने होली गायन के लिए पहुंचे सोनपुर के लोकगायकों की टोली को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हिन्दू समाज को जोड़ने में होली सर्वोत्तम उदाहरण है। इस होली ने न सिर्फ जाति भेद को निर्मूल किया है, बल्कि हिन्दू समाज को एकजुट व मजबूत रखने में बड़ी भागीदारी निभायी है। उन्होंने होली की इस प्राचीन धरोहर व परंपरा को अक्षुण्ण रखने की जरुरत पर बल दिया।

मालूम हो कि, आश्रम के सौ वर्षों के इतिहास में कभी भी होली का रंग बदरंग नही हुआ। आज भी परंपरागत रुप से होली हो रही है। लोकसेवा आश्रम के व्यवस्थापक संत मौनी बाबा का आर्शीवचन भक्तों को प्राप्त हो रहा है।

इसी परंपरा की कड़ी में बीते 8 मार्च को जमकर होली की धूम मची, जिसमें सोनपुर गांव की कई अलग-अलग -फाग लोक गायकों की टोली ने अपनी गायिकी से दिवंगत संतों को अपनी ओर से श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

बिहार प्रदेश उदासीन महामंडल प्रबंध समिति के अध्यक्ष संत विष्णुदास उदासीन की उपस्थिति में होली मिलन समारोह संपन्न हुआ, जिसमें आश्रम की परंपरा के तहत भक्त गायकों की टोली को काजू, किसमिस, बादाम, सौंप, गरी, छोहाड़ा, मुनक्का एवं शुद्ध गौ दुग्ध मिश्रित पेय (शर्बत) पिलाया गया। इसके अतिरिक्त अन्य पवित्र ठंढई, व्यंजन के रुप में सभी आगत भक्तों व गायकों की टोली को मालपुआ का प्रसाद दिया गया।

इस होलिकोत्सव में सोनपुर के चिड़िया बाजार, कोयरी टोली, सिद्धनाथ चौक की टीमों ने जमकर होली गायन प्रस्तुत की। कोयरी टोली के मथुरा महतो की टीम में मथुरा महतो ढ़ोलक पर संगत कर रहे थे, जबकि सिद्धनाथ चौक की होली में ढ़ोलक पर तारकेश्वर सिंह संगत कर रहे थे।

गायकों में ठाकुर संग्राम सिंह, अशोक सिंह, अवकाश प्राप्त स्टेशन मास्टर राजकिशोर सिंह आदि शामिल थे। इस अवसर पर अबीर-गुलाल से आश्रम का रंग सतरंगी बन गया। भक्तों की होली की रंगभरी टोली ने स्व. संत बाबा ज्ञान दास, संत बाबा स्व.रामलखन दास, संत बाबा स्व. रामदास उदासीन की प्रतिमाओं के समक्ष पहुंचकर उन्हें नमन किया।

उदासीन संप्रदायाचार्य भगवान श्रीचंद्र जी महाराज को भी श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। भक्तों ने भगवान सूर्य, भगवान शनि एवं बाबा भगेश्वरनाथ महादेव का भी दर्शन-पूजन किया। इस दौरान आश्रम प्रांगण में पिछले चार वर्षों से चल रहे अखंड संकीर्तन श्रीराम जयराम जय जय राम का निरंतर जाप चल रहा है। जिसमें गुलाब सिंह, प्रह्लाद सिंह, सोनू कुमार, दशरथ राय एवं पुजारी अनिल झा, लक्ष्मण दास के नेतृत्व में टोली जमी थी।

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