Advertisement

क्रांतिकारी किसान, सत्याग्रही शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी पर इतिहासकार कर रहे शोध

अमेरिकी इतिहासकार शहीद के पैतृक आवास सबलपुर पहुंचकर जाना जीवन वृत

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार के सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी व किसान सत्याग्रही शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी के जीवन वृत पर अमेरिकन इतिहासकार प्रोफेसर विलियम आर. पिंच शोध कर रहे हैं। इस सिलसिले में वे 7 मार्च को शहीद के गांव सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर बभनटोली पहुंचे। उन्होंने शहीद के पैतृक आवास पर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की और उनके बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की।

इतिहासकार पिंच ने इस दौरान शहीद द्वारा जेल जीवन के दौरान लिखे गए पत्र की फोटो कॉपी भी प्राप्त की, जिस पर तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी की जीवनी पर अमेरिका में शोध (रिसर्च) की जाएगी। उपरोक्त बातें अमेरिकन इतिहासकार प्रोफेसर विलियम आर. पिंच ने कही।

विदित हो कि प्रोफेसर पिंच अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य के मिडिलब टाउन शहर स्थित वेस्लेयन यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर हैं। इन्हें दक्षिण एशियाई इतिहास के एक प्रतिष्ठित इतिहासकार व प्रोफेसर के रूप में ख्याति प्राप्त है। पिंच मुख्य रूप से भारत में भक्ति परंपराओं, संन्यासी, योद्धाओं और औपनिवेशिक काल के धार्मिक एवं सामाजिक इतिहास पर अपने शोध के लिए जाने जाते हैं।

प्रोफेसर पिंच इस साल भारत दौरे पर है एवं सबसे ज्यादा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भ्रमण कर रहे हैं। इस क्षेत्र के हिंदी केंद्र के सन 1930-40 के बीच के कृषि क्रांतिकारियों और उनके धार्मिक एवं दार्शनिक दिमाग पर एक पुस्तक के लिए शोध कर रहे हैं और उनकी जानकारियां जुटा रहे हैं।अपने इसी शोध कार्य के दौरान पिंच सोनपुर के सबलपुर बभनटोली स्थित क्रांतिकारी किसान नेता शहीद ब्रह्मचारी के पैतृक आवास पहुंचे और वहां उनके परिजन एवं ग्रामीणों से मुलाकात किया और ब्रह्मचारीजी के बारे में अहम जानकारियां प्राप्त की।

कौन हैं शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी

वर्ष 1934 के पांच जुलाई को पटना के खाजेकला घाट पटना सीटी में क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम देने के क्रम में खाजे कलां बम विस्फोट कांड हुआ था, जिसमें ब्रह्मचारी अपने सहयोगियों संग गिरफ्तार किए गए थे। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ के.के दत्त की इतिहास की पुस्तक बिहार में स्वातंत्र्य आंदोलन का इतिहासnभाग-2 के पेज 312 पर लिखा है कि फरवरी 1939 में जब महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने छपरा (अब सिवान) के अमवारी नामक स्थान में बकाश्त सत्याग्रह शुरू किया तो 16 साथियों के साथ 24 फरवरी को उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें छह माह की सजा हुई।

राहुलजी की मांग के समर्थन में ब्रह्मचारीजी ने भी 77 दिनों की भूख हड़ताल की। इसी पुस्तक में राजबंदियों की जिलावार सूची में रामवृक्ष ब्रह्मचारी को आतंकवादी समाजवादी के रूप में गिरफ्तार कर रखे जाने की चर्चा है। अगस्त क्रांति के सिलसिले में 10 अगस्त 1942 को उन्हें सबलपुर गांव से ही गिरफ्तार किया गया। उन्हें पटना कैंप जेल, फिर फुलवारी शरीफ जेल और वहां से हजारीबाग जेल भेजा गया, जहां 30 अगस्त 1945 को वे अंग्रेजों के अत्याचार से शहीद हो गए।

स्वामी सहजानंद सरस्वती ने लिखा 90 दिनों तक किया भूख हड़ताल

प्रसिद्ध दंडी स्वामी और किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक मेरा जीवन संघर्ष में लिखा है कि किसान बंदियों को लेकर राम वृक्ष ब्रह्मचारी पूरे 90 दिनों तक भूखे रहे। उन्होंने शहीद को अपना सच्चा साथी बताया है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *