अपने ही जाल में फंसे चंदवाजी के पूर्व एसएचओ
जयपुर/चंदवाजी। जमीन से जुड़े प्रकरण में बिल्डर को हिरासत में लेकर खाली पेपर हस्ताक्षर करवाकर परेशान करने के मामले में चंदवाजी थाने के पूर्व एसएचओ विक्रांत शर्मा (SHO Vikrant Sharma) के खिलाफ चंदवाजी थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इस संबंध में लोहिया कॉलोनी वैशाली नगर निवासी मुकेश महावर ने इस्तगासा के जरिए रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
रिपोर्ट में बताया कि वह उसकी कंपनी (Company) के जरिए 2007 में मैसर्स गोल्ड डेवलपर्स से एक को-लैबरेशन एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें लबाना गांव में 500 बीघा जमीन एकत्र करके देनी थी, लेकिन 2010 में दोनों के बीच व्यापारिक मतभेद हुए तो दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ चंदवाजी थाने में मुकदमे दर्ज करवाए।
2011 में उनके बीच एक सेटलमेंट एग्रीमेंट हुआ और दोनों ने ही केस वापस ले लिए, लेकिन गोल्ड डेवलपर्स ने 500 बीघा जमीन की एनओसी (NOC) वापस नहीं दी।
जबरन खाली पेपर पर हस्ताक्षर और प्रताड़ना
इस पर पीड़ित ने 2014 से 2016 तक वापस एक दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा दिए। पुलिस ने दोनों मुकदमों में सिविल नेचर मानकर एफआईआर लगा दी। वर्ष 2018 में आए एसएचओ विक्रांत शर्मा ने 2011 वाले एग्रीमेंट (Agreement) की एक फोटो कॉपी एफएसएल में भेजकर परिवादी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
एसएचओ ने कोर्ट से मुकेश का वारंट जारी करवा लिया और उसे चंदवाजी थाने ले जाकर जबरन दो खाली पेपर पर हस्ताक्षर करवाकर प्रताड़ित किया गया। पैसे लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया।
उसके बाद एसएचओ किसी अन्य व्यक्ति मीठा लाल को अरेस्ट करके 2011 वाले एग्रीमेंट को फर्जी करार देने के लिए चाकसू स्थित फार्म हाउस ले गए, जहां पर उससे नक्शा मौका बनवाकर हस्ताक्षर करवा लिए, जबकि फार्म हाउस ही 2014 में खरीदा गया था।
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