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वेतन कटौती और ईपीएफ गड़बड़ी के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर स्वास्थ्यकर्मी

प्रहरी संवाददाता/बगोदर (गिरिडीह)। गिरिडीह जिले के सदर अस्पताल सहित सभी 13 ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत 700 आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मी 23 जून से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चले गए।

जानकारी के अनुसार कर्मचारियों ने वेतन में कटौती और ईपीएफ में गड़बड़ी सहित सात सूत्री मांगों को लेकर गिरिडीह सदर अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू किया है। आंदोलन का नेतृत्व जेएलकेएम (झारखंड लेबर कर्मी मंच) के केंद्रीय सचिव नागेंद्र चंद्रवंशी और आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मी संघ द्वारा किया गया। धरना के दौरान चंद्रवंशी ने कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनी डिटेक्टिव फोर्स प्राइवेट लिमिटेड जो बालाजी और शिवा कंपनी के साथ स्वास्थ्य विभाग के तहत कार्यरत है, लगातार कर्मचारियों का मासिक वेतन काट रही है और ईपीएफ में भी गड़बड़ी कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों को लेकर पहले भी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपा गया और आंदोलन भी किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कर्मचारियों में इसे लेकर गहरा आक्रोश है। धरना स्थल पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि वेतन में कटौती और ईपीएफ से जुड़ी अनियमितताओं के कारण उनका जीवन मुश्किल हो गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है और बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। कई कर्मचारियों को पिछले महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है।

गिरिडीह जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित

स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य बहिष्कार के कारण जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।आम जनों को इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य कर्मचारियों की मुख्य मांगो में वेतन में हो रही कटौती पर रोक लगाने, ईपीएफ गड़बड़ी की जांच और समाधान करने, समय पर वेतन भुगतान करने, स्थायी रोजगार की दिशा में ठोस कदम उठाने, स्वास्थ्य विभाग से सीधी नियुक्ति करने, आउटसोर्सिंग कंपनी की कार्य प्रणाली की जांच करने, कर्मचारी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने आदि शामिल है।

बताया गया कि जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिकिर्या नहीं आई है। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने चेतावनी दी है की जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती, तब तक ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेंगे। यह हड़ताल राज्य में आउटसोर्सिंग प्रणाली की कार्यशैली और श्रमिक अधिकारी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़ा कर रही है।

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