भारत और नेपाल के बीच आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता और होगी सुदृढ़
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरनाथ से मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं को जनमानस के बीच पुनः स्थापित करना एवं भारत और नेपाल के बीच आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करना है।
उक्त बातें 8 मार्च को जिला के हद में सोनपुर के संकट मोचन हनुमान मंदिर सबलपुर में हरिहरनाथ– मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा के आयोजन को लेकर आहुत बैठक को संबोधित करते हुए धर्म जागरण समन्वय के क्षेत्र प्रमुख सूबेदार सिंह ने कही। बैठक में यात्रा की तिथियों, मार्ग तथा विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई और आयोजन को भव्य तथा सुव्यवस्थित बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में जानकारी दी गई कि यह पवित्र यात्रा हरिहरनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर मुक्तिनाथ मंदिर तक आयोजित की जाएगी। बैठक में हरिहरनाथ – मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा की तिथि निर्धारित की गई। कहा गया कि यह यात्रा आगामी 13 अप्रैल से 19 अप्रैल तक चलेगी। धार्मिक पंचांग के अनुसार यह यात्रा बैसाख कृष्ण पक्ष एकादशी से प्रारंभ होकर बैसाख शुक्ल पक्ष द्वितीया (संवत् 2083) तक संचालित होगी।
धर्म जागरण समन्वय के क्षेत्र प्रमुख सूबेदार सिंह ने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर धर्मसभाओं, प्रवचनों तथा महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिनमें विद्वान वक्ताओं द्वारा धर्म और अध्यात्म के विषय में रहिवासियों को प्रेरित किया जाता है। कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस यात्रा की परंपरा प्राचीन काल से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने भी इस मार्ग की आध्यात्मिक महत्ता को प्रतिष्ठित किया था।
उत्तर क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली नारायणी नदी, जिसे काली गंडकी भी कहा जाता है, अपने भीतर पाए जाने वाले पवित्र शालिग्राम शिलाओं के कारण विशेष महत्व रखती है। इस नदी का उद्गम स्थल नेपाल स्थित मुक्तिनाथ क्षेत्र माना जाता है। इसी क्षेत्र से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार गज और ग्राह के युद्ध का प्रसंग भी इसी नदी से संबंधित है, जिसका समापन गंडकी और गंगा के संगम स्थल सोनपुर में हुआ था। मान्यता है कि भगवान विष्णु स्वयं प्रकट होकर ग्राह को मुक्ति प्रदान कर गज की रक्षा की थी। इसी पावन स्थल पर स्थित हरिहरनाथ मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
यात्रा के सफल संचालन के लिए सौंपी गई संगठनात्मक जिम्मेवारी
बैठक में यात्रा के सफल संचालन के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारियों का भी निर्धारण किया गया। यात्रा के संयोजक के रूप में अजीत कुमार आर्य तथा नगर संयोजक के रूप में अभिमन्यु को जिम्मेदारी सौंपी गई। यात्रा के संचालन के लिए गठित आयोजन समिति में अनेक प्रमुख सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तित्व शामिल हैं। समिति के अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह (पूर्व राज्यसभा सांसद) हैं। वहीं प्रो. डॉ राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता (विधान पार्षद), डॉ मुरारी मोहन झा (विधायक) तथा बिनोद सिंह सम्राट (सोनपुर) उपाध्यक्ष हैं।
इसी प्रकार समिति के महासचिव के रूप में अनुप कुमार (दिल्ली), रिंकी कुमारी (दरभंगा), मिथिलेश कुमार सिंह (पटना) तथा डॉ आशुतोष कुमार (सोनपुर) कार्यभार संभालेंगे, जबकि कोषाध्यक्ष के रूप में सुशील अग्रवाल (मुजफ्फरपुर) को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त अन्य सदस्यों में डॉ संजय जायसवाल (सांसद), संतोष कुमार सिंह (विधान पार्षद एवं पूर्व मंत्री, बिहार सरकार), जीवन कुमार (विधान पार्षद), अशोक सिंह (पूर्व विधायक पारू), रिंकू सिंह (पूर्व विधायक, वाल्मीकि नगर), मनोज सिंह (पूर्णिया) तथा संजय कुमार सिंह (सराय, वैशाली) शामिल हैं।
बैठक में धर्म जागरण समन्वय के प्रचारक प्रमुख संत रविदास, प्रांत संयोजक अनिल ओझा, प्रांत सह- संयोजक अरुण सिन्हा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्राम विकास के प्रांत सह-संयोजक रंधीर कुमार, जिला संयोजक डॉ त्रिभुवन झा, सह-संयोजक राजेश कुमार सिंह, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह-मंत्री यशवंत कुमार सहित शंभूनाथ सिंह, कुंवर सोनू सिंह, राज सिगरीवाल, करणजीत सावरियां, संजीव कुमार सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सांस्कृतिक यात्रा श्रद्धालुओं की आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ भारत और नेपाल के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी। साथ ही श्रद्धालुओं से इस पुण्य यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया गया।
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