सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum District) के हद में छोटानागरा पंचायत के जोजोगुटू गांव में हरबोंगा पूजा किया गया। पूजा में बड़ी संख्या में आसपास के दर्जनों गांव के सैकड़ो ग्रामीण रहिवासी शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार गांव में फैली अज्ञात बीमारी से ग्रामीणों को मुक्ति दिलाने के लिए गांव के दिऊरी बगना देवगम और ठाकुर सोरेन के नेतृत्व में पारम्परिक जुगनी हरबोंगा पूजा किया गया। इसके लिये मिट्टी की मूर्ति बनाई गई थी। मूर्ति को एक महिला का रुप दिया गया।
महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर वाहन पर बैठी है और पास में महिला का पति व बकरी मौजूद हैं। दिऊरी ने बताया की पूजा का उद्देश्य गांव के सीमा में आने वाले तमाम प्रकार के दूषित व गलत आत्मा को गांव से बाहर भगाना है। पूजा से ग्रामीणों को तमाम प्रकार की विपत्ति से मुक्ति मिलेगी।
पूजा में मुर्गी की बली दी गई और बकरे के बच्चे की पूजा कर उसके गले में लाल कपड़ा बांधकर उसे गांव की सीमाना के बाहर छोड़ दिया गया। पूजा के बाद एक विशेष प्रकार की जड़ी को गांव की सीमाना के चारों तरफ तथा तमाम ग्रामीणों के घरों के दरवाजे के आगे जमीन के अंदर गाड़ा गया। इससे लोगों के घर में दूषित आत्मा का प्रवेश नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि सारंडा क्षेत्र में चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं है। सिर्फ नाम के लिए छोटानागरा, जामकुंडिया, दोदारी आदि गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र सिर्फ एमपीडब्लू व एएनएम के भरोसे खोल दिया गया है। यहां डॉक्टर कभी अपनी सेवा नहीं देते है और स्वास्थ्य कर्मी भी गायब रहते हैं।
चिकित्सा की बदत्तर स्थिति और सारंडा के गांवों से अस्पतालों की दूरी लगभग 30-35 किलोमीटर है। इससे वहां जाने के लिए यातायात या एम्बुलेंस की कोई सुविधा नहीं होने की वजह से सारंडा के गांवों से अंधविश्वास खत्म नहीं हो रहा है। जोजोगुटू काफी शिक्षित गांव है, लेकिन सरकार वहां चाहकर भी इस पौराणिक परंपरा व अंधविश्वास को खत्म नहीं करा पा रही हैं।
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