गुरु-कृपा, विद्या और संस्कारों की संगमस्थली बना विद्यालय परिसर
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर 5/बी बोकारो में 8 जुलाई का दिन आत्मगौरव, श्रद्धा और उल्लास से परिपूर्ण रहा। विद्यालय ने अपने स्थापना के 46 गौरवपूर्ण वर्ष पूरे होने पर भव्य समारोह का आयोजन किया।
इस ऐतिहासिक अवसर ने गुरु-कृपा, शैक्षिक समर्पण और संस्थागत एकता की त्रिवेणी को जीवंत कर दिया। समारोह की शुरुआत प्रातः सुखमणि साहिब के पाठ के साथ की गयी, जिससे समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और संतभाव से आलोकित हो उठा। इसके उपरांत भाई नंदलाल सभागार में सुसंस्कृत कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षिकाओं द्वारा प्रस्तुत समवेत सबद-गायन ने गुरु परंपरा की गरिमा को पुनः जागृत कर दिया।
आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य सौमेन चक्रवर्ती ने कहा कि यह विद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, अपितु संस्कारों की प्रयोगशाला है। हम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आज इस संस्था की जो प्रतिष्ठा है, वह संस्थापकों की दूरदर्शिता और परिश्रम का प्रतिफल है।
जीजीईएस अध्यक्ष तरसेम सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु गोबिंद सिंहजी की शिक्षाएँ हमें जीवन के हर क्षेत्र में सत्य, साहस और सेवा की प्रेरणा देती हैं। विद्यार्थी इस राष्ट्र का भविष्य हैं। उन्हें हम जितना सशक्त और सुसंस्कारित बनाएंगे, देश उतना ही उज्ज्वल बनेगा। सचिव एस.पी. सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल सूचनाओं का संकलन नहीं, बल्कि मानवता, नैतिकता और विवेक का संचार है। विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक तीनों जब मिलकर कार्य करते हैं, तभी चरित्रवान समाज की नींव रखी जाती है।
इसके पश्चात सभी गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में केक काटने की रस्म की गयी, जिससे उत्सव का उल्लास चरम पर पहुँच गया। इस अवसर पर जीजीईएस के सदस्यगण, कांडरा इकाई के निदेशक प्रियदर्शी जरूहार, जीजीपीएस चास के प्राचार्य अभिषेक कुमार, उपप्राचार्य प्रभारी धनबाद सुदीप कुमार ठाकुर, प्रभारी जी.के.मिश्रा, उप प्रधानाचार्या माध्यमिक इकाई सुमन नांगिया, कुमारी सुधा, देव्यंती सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिका, कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
मंच संचालन सुष्मिता होरो एवं शुभाश्री ने प्रभावशाली ढंग से निभाया, जबकि सुमन नांगिया ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन किया। बारिश की हल्की फुहारों के बीच यह आयोजन गुरु-आशीर्वाद, विद्या की गरिमा और संगठनात्मक एकता का प्रतीक बनकर संपन्न हो गया।
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