संतोष कुमार/वैशाली(बिहार)। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ठान लिया है कि जनता के नजर में उन्हें अपनी छवि को और बेहतर तरीके से रखना है, ताकि आगे की राजनीति उनके पक्ष में हो सके। इसे लेकर विधान सभा चुनाव के बाद से ही सिलसिलेवार सभी तरह के विवाद उत्पन्न होते जा रहे है।
हालांकि सरकार की कुछ खास जिम्मेदारियां है। जिसे हर हाल में नीतीश सरकार ने पूरा करने का संभवतः संकल्प ले लिया है। हाल ही में विपक्ष के विभिन्न आरोपों का जवाब सरकार (Government) की तरफ से लगातार दिए जाने की कोशिशें भी बदस्तूर जारी है। इसी कड़ी में फिर एक बार नीतीश सरकार (Niteesh government) के एक फैसले ने पंचायत के मुखिया पर अनुशासनात्मक दिशा तय करने का निर्णय लिया है। जिसकी विपक्ष की तरफ से आलोचनाएं भी हो रही है। मालूम हो कि राज्य की नीतीश सरकार ने तय कर लिया है कि जिस पंचायत में नल जल योजना में लापरवाही साबित हो जाएगी, उस पंचायत के मुखिया को चुनाव लड़ने से वंचित किया जा सकता है। हालांकि यह निर्णय पंचायत प्रतिनिधियों को सकते में डालने वाला भी है। सरकार ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है। जिसे लेकर आमचर्चा का बाजार भी काफी हलचल भरा दिख रहा है।
वैशाली जिले में भी संभावनाओं और कयासों की झड़ी लगती दिख रही है। इस संबंध में राजनीतिक तौर पर जागरूक रहिवासियों का कहना है कि यह निर्णय राजनीति के क्षेत्र में चर्चाओं का केंद्र बन सकता है। चुकी पंचायत चुनाव को लेकर लोगों में काफी उत्साह भी है। ऐसे में इस तरह से सरकारी आदेश से पंचायत प्रतिनिधियों में चिंता भी देखी जा रही है। हालांकि अब तक सरकार के उक्त आदेश के प्रभाव की कोई विशेष कहानी नहीं बन सकी है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा लिया गया इस निर्णय का दूरगामी परिणाम सबको चौंकाने वाला भी हो सकता है।
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