चीनी मिल चालू करने हेतु डीएम द्वारा अधिकारियों की टीम गठन स्वागत योग्य
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। समस्तीपुर जिला विकास मंच द्वारा समस्तीपुर का बंद चीनी मिल चालू करने को लेकर जारी धारावाहिक संघर्ष को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा बंद चीनी मिल को चालू करने की दिशा में कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों की टीम गठित कर रिपोर्ट मांगने के कदम को चीनी मिल चालू होने की दिशा में स्वागत योग्य कदम है।
समस्तीपुर के जिलाधिकारी द्वारा बीते 23 फरवरी को टीम गठन के बाद 24 फरवरी को जिला विकास मंच एवं भाकपा माले की संयुक्त टीम सुरेंद्र प्रसाद सिंह, दीनबंधु प्रसाद, रामबली सिंह आदि के नेतृत्व में बंद चीनी मिल परिसर का दौरा कर परिसर का मुआयना किया। मौके पर मंच के सदस्य सह भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने मिल संचालन के लिए आधारभूत आवश्यकता की जानकारी देते हुए कहा कि चीनी मिल के लिए कम से कम 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है, जबकि बंद मिल के पास 22 एकड़ से भी अधिक जमीन है। कहा कि चीनी मिल के मशीनों एवं उपकरणों को चलाने के लिए विधुत आवश्यक है।
उक्त मिल के चौक पर ही विधुत ग्रीड है। उन्होंने कहा कि गन्ने को मिल तक पहुंचाने एवं तैयार चीनी को बाजार तक पहुंचाने को इस मिल के पास रेल परिवहन सुविधा मौजूद है। किसान के खेत से गन्ने को मिल तक पहुंचाने एवं चीनी को बाजार तक पहुंचाने के लिए मिल के चारों ओर सड़क सुविधा मौजूद है। वहीं मिल में पानी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मिल से सटे बूढ़ी गंडक नदी समेत अन्य जल स्रोत है। कहा कि चीनी मिल के बगल में गाद की सफाई के बाद निकासी हेतु बूढ़ी गंडक नदी है। मिल के लिए गन्ने की उपलब्धता जरूरी है। मिल के आसपास के वारिसनगर, कल्याणपुर, पूसा, ताजपुर, मोरबा- सरायरंजन, उजियारपुर आदि प्रखंड गन्ना उत्पादक केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि मिल के आसपास के क्षेत्रों में सस्ते श्रमिक की बहुलता है।
माले नेता सिंह ने बताया कि 22 एकड़ से अधिक भूमि क्षेत्र में फैला समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1917 में अंग्रेज सरकार द्वारा किया गया था। यह मिल बिहार के तत्कालीन सभी मिलों में सुमार थी। यहां उच्च कोटी का चीनी का उत्पादन होता था। सरकार की अनदेखी के कारण वर्ष 1997 में मिल बंद हो गई। मिल को चालू करने का कई बार प्रयास हुआ लेकिन असफल रहा। कहा कि जिला विकास मंच एवं भाकपा माले बंद चीनी मिल को चालू करने की मांग को लेकर लगातार संघर्षरत हैं। संगठन द्वय हरेक मंच व् मौके पर उक्त चीनी मिल को चालू करने की मांग उठाती रही है।
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