एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) द्वारा वर्ल्ड बैंक की मदद से 800 करोड़ की लागत से बनने वाला गेतलसूद डैम में सोलर पावर प्लांट योजना को अविलंब रद्द करे हेमंत सोरेन सरकार अन्यथा उग्र आंदोलन किया जायेगा।
उपरोक्त बातें 10 जुलाई को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईमेल भेज कर कही।
नायक ने कहा कि जेवीवीएनएल द्वारा गेतलसूद डैम में प्रस्तावित वर्ल्ड बैंक की मदद से 800 करोड़ के लागत से बनने वाला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट योजना के क्रियान्वयन होने से अनगड़ा, गेतलसूद और ओरमांझी के लगभग 1500 से अधिक मछुआरों के परिवार एवं भारी संख्या में ग्रामीणों को इस पावर प्लांट लगाने से उनके परिवारों के समक्ष भूखों मरने की नौबत आ जाएगी, जो गेतलसूद डैम के आश्रित है।
उन्होंने कहा कि इस योजना का ग्राम सभा और स्थानीय दलित आदिवासी मूलवासी समाज द्वारा वर्ष 2020 से ही जबरदस्त तरीके से पुरजोर विरोध किया जा रहा है।
स्मरण हो कि इस योजना को अमली जामा पहनाने हेतु बीते 9 जुलाई को गेतलसूत में ग्राम सभा का आयोजन किया गया था, जिसमें स्थानीय ग्रामीण, पुलिस प्रशासन, जन प्रतिनिधि और पावर प्लांट निर्माण करने वाली कंपनी सेकी के प्रतिनिधि शामिल थे। जिसमें ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जान देंगे मगर पावर प्लांट नहीं लगने देंगे।
नायक ने कहा कि गेतलसूद डैम के निर्माण में स्थानीय रहिवासी विस्थापन का दंस भी झेल चुके हैं। वे विस्थापन की मार से उबरे भी नहीं है कि उन विस्थापित परिवार के ऊपर अब रोजी, रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है।
क्योंकि गेतलसूद डैम से उनका (विस्थापितों का) रोजी रोजगार जुड़ा हुआ है। यहां सोलर पावर प्लांट लगने से उनका रोजगार पुरी तरह छिन जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में इस योजना को लगाने की दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था, जिसमें ग्रामीणों एवं मछुआरों के जबरदस्त विरोध होने के कारण उक्त योजना ठंडे बस्ती में चला गया था।पुनः इस योजना को चालू करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
जिसके चलते ग्रामीण एवं मछुआरा समाज फिर से आंदोलन की ओर अग्रसर हो चुके हैं। अगर समय रहते इस बिंदु पर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो आने वाले दिनों में भीषण एवं उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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