क्षेत्र के मजदूरों में हर्ष का माहौल-आरसीएमयू
प्रहरी संवाददाता/बोकारो। बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा कोलियरी का उत्पादन इन्वायरमेंट क्लियरेंस (ईसी) और सीटीओ नहीं मिलने के कारण इस साल के पहले दिन 1 जनवरी से बंद था।
उत्पादन बंद होने से कथारा वाशरी और स्वांग वाशरी भी कोयले के अभाव के कारण बंदी के कगार पर था। कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक हर्षद दातार के सार्थक प्रयास से कोलियरी को ईसी मिलना शुभ संकेत है। उक्त बातें राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने 19 अक्टूबर को एक भेंट में कही।
सिंह ने बताया कि कथारा कोलियरी से कोयला उत्पादन नहीं होने से कथारा वाशरी तो बिल्कुल ही बंद पड़ा है। बंद रहने के कारण देश की बुनियादी आवश्यकता की चीजों में जो कोयले का महत्व है उस पर तो असर पड़ा है, राज्य को राजस्व की भी हानि हुई। बंदी के कारण मजदूरों के रहन-सहन और जीवन यापन पर गहरा आघात लगा है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से सिर्फ संभावनाएं प्रतीत होता था, लेकिन बीते 18 अक्टूबर को पर्यावरण स्वीकृति मिलते ही अब अति शीघ्र उत्पादन प्रारंभ होगा। उत्पादन प्रारंभ होते ही क्षेत्र का उत्पादन तथा उत्पादकता का ग्राफ ऊंचा होगा, जिससे मजदूरों के वेलफेयर पर भी इसका अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।
दूसरी तरफ मशीनों का समुचित प्रयोग के लिए ऑपरेटर की कमी को दूर करना होगा, अन्यथा डंपर ऑपरेटर, डोजर ऑपरेटर, शोवेल ऑपरेटर के अभाव में उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
गया हो कि, कथारा कोलियरी को ईसी मिलने से पूरे क्षेत्र के मजदूरों में काफी हर्ष का माहौल है। लंबे समय के बाद जहाँ समय का सदुपयोग होगा, वही आर्थिक स्थिति में भी इजाफा होगा। सीसीएल मुख्यालय और क्षेत्रीय प्रबंधन के साथ परियोजना प्रबंधन के गंभीर पहल से उत्पादन सुचारू रूप से चल सकेगा। क्षेत्र में महाप्रबंधक के रूप में योगदान देते ही हर्षद दातार का पहला प्रयास सफल साबित हुआ।
राज्य स्तर पर बेरमो विधायक कुमार जय मंगल उर्फ अनूप सिंह के पिछले बंद के समय भी सीटीओ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका था। इस बार भी संगठन के पदाधिकारियों ने अति शीघ्र सीटीओ दिलाने की मांग बेरमो विधायक से की है।
राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष व विधायक प्रतिनिधि अजय कुमार सिंह ने हर्ष प्रकट करते हुए सीसीएल प्रबंधन को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि अब 10 वर्षों से अधिक समय तक उत्पादन सुचारू रूप से चलता रहेगा और मजदूरों के चेहरे पर मुस्कान लौटेगी।
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