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वासंती नवरात्र में डोली पर सवार होकर आ रही हैं देवी दुर्गा

आगामी 19 मार्च से आरंभ हो रहा चैत्र नवरात्रि का महापर्व

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ इस बार 19 मार्च को हो रहा है। सबसे खास बात यह है कि देवी माता दुर्गा का शुभागमन डोली पर और बिदाई हाथी पर हो रही है।

ज्योतिषीय दृष्टि से देवी का डोली पर आगमन देश और दुनिया के लिए अशुभ व चुनौतीपूर्ण होगा। यह समाज में आर्थिक अस्थिरता, राजनीतिक उथल-पुथल, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का संकेत देता है। वहीं, हाथी पर देवी की बिदाई अत्यंत शुभ कारी है और सुख-समृद्धि का लेकर आने वाला है। यह अच्छी वर्षा, कृषि में उन्नति और भविष्य में देश में खुशहाली आने का प्रतीक है।

उक्त जानकारी 16 मार्च को सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्व विख्यात बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री ने दी। उन्होंने बताया कि नवरात्रि पर बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर में स्थापित देवी मूर्तियों के दर्शन पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।सूर्य एवं शनि मंदिर के पुजारी पंडित अनिल झा बताते हैं कि नवरात्रि में माता का वाहन उस दिन के आधार पर तय होता है, जिस दिन नवरात्रि शुरू होती है।

बताया कि शास्त्रों के अनुसार दोलायां मरणं विभो अर्थात् यदि माता डोली पर आती हैं, तो इसे अस्थिरता, महामारी और राजनीतिक उथल-पुथल का प्रतीक माना जाता है। कहा कि डोली एक मानव वाहन है, जिस पर जब ब्रह्मांड की शक्ति देवी दुर्गा डोली जैसे अस्थिर वाहन पर सवार होती है, तो भविष्य में जन-धन की हानि या प्राकृतिक आपदाओं की संभावना का संकेत है।

उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है, क्योंकि यह वसंत ऋतु में आती है। इन नौ दिनों में सात्विक भोजन, अखंड ज्योति का ध्यान और ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है। बाबा हरिहरनाथ मंदिर के पुजारी पंडित पवनजी शास्त्री ने बताया कि घट स्थापना यानी कलश स्थापना के लिए आगामी 19 मार्च को प्रातः 6:52 बजे से 7:43 बजे तक का समय विशेष शुभ रहेगा। इसके अतिरिक्त दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में 12:05 से 12:53 बजे तक भी कलश स्थापना की जा सकती है। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा होगी।

20 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, 21 मार्च को मां चंद्रघंटा, 22 मार्च को मां कुष्मांडा, 23 मार्च को मां स्कंदमाता, 24 मार्च को मां कात्यायनी, 25 मार्च को मां कालरात्रि, 26 मार्च को मां महागौरी पूजा एवं अष्टमी – कन्या पूजन तथा 27 मार्च को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी।

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