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भक्त की श्रद्धा से ही भगवान का होता है अवतार-आचार्य सुमन्त कृष्ण शास्त्री

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजन पर झूमे श्रद्धालु

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित श्रीराधा-कृष्ण मंदिर के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चौथे दिन 22 अगस्त को वृन्दावन धाम से पधारे कथा वाचक भागवत रत्न आचार्य सुमन्त कृष्ण शास्त्री (कन्हैयाजी) महाराज ने कहा कि भक्त की श्रद्धा से ही भगवान का अवतार होता है। भक्त अपनी श्रद्धापूर्वक भक्ति भाव से पत्थर में भी भगवान को प्रगट कर देता है। भक्त प्रह्लाद के भाव से भगवान नृसिंह रूप में अवतार लेकर खम्भ से प्रकट हुए और संकेत दिया कि भक्त की भक्ति में अगर कोई बाधा उत्पन्न करता है अथवा मेरे परम भक्त को कष्ट देता है वह मुझसे सहन नहीं होता। उसकी रक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी मेरी ही हो जाती है।

महाराजजी ने कहा कि हरिहर क्षेत्र में भी जड़भरत की कथा का प्रसंग आता है, इसी क्षेत्र में जड़भरतजी ने राजा रहुगण को उपदेश कर उनका अभिमान दूर किया था। जड़भरतजी के उपदेश से प्रभावित होकर राजा ने यहीं समाधि ले ली थी।
श्रीगजेंद्र मोक्ष के प्रसंग पर हरिहर क्षेत्र की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि इसी भूमि पर भगवान नारायण स्वयं हरि अवतार लेकर पधारे ग्राह के फंदे से गजेंद्र की रक्षा की थी। इसी पावन भूमि पर भगवान ने ग्राह को मुक्ति प्रदान की। कहा कि संसार में जब -जब धर्म की हानि होती है, दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है। तब – तब परमात्मा का अवतार होता है। धर्म की रक्षा के लिए भगवान राम और कृष्ण के रूप में अवतार लेकर पधारे।

कथा प्रसंग के अनुसार उन्होंने जड़भरत चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, गजेन्द्र मोक्ष, वामन अवतार, श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म की कथा पर विस्तार से प्रकाश डाला। रात्रि कालीन बेला मे कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण का छठी महोत्सव मनाया गया और कथा के उपरान्त सभी भक्तों ने भंडारा का प्रसाद ग्रहण किया।

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