एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के भीष्म पितामह दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न प्रदान करने, उनके मोराबादी आवास को संग्रहालय बनाने और झारखंड के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उनके जीवन परिचय को शामिल किया जाय।
उपरोक्त बाते 5 अगस्त को देश के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व् झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ई मेल द्वारा अनुरोध पत्र भेजकर आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने कहा कि वे आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष के रूप में आदिवासी समुदाय और झारखंड के लाखों रहिवासियों की भावनाओं को व्यक्त करते हुए यह पत्र लिख रहे हैं।
यह पत्र झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, और आदिवासी आंदोलन के प्रतीक, दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन के प्रति सम्मान और उनकी विरासत को संरक्षित करने के लिए है। नायक ने कहा कि दिवंगत सोरेन ने अपने जीवनकाल में आदिवासी समुदाय के अधिकारों, सामाजिक न्याय और झारखंड राज्य के गठन के लिए अतुलनीय संघर्ष किया है।
उनके योगदान ने न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश में आदिवासी पहचान को सशक्त बनाया। उनके निधन के पश्चात, उनकी स्मृति को जीवित रखने और भावी पीढ़ियों को उनके आदर्शों से प्रेरित करने के लिए भारत रत्न प्रदान करने हेतु शिबू सोरेन को उनके सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक योगदानों के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान किया जाए। यह सम्मान उनकी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देगा।

झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी स्थित दिवंगत के आवास को एक संग्रहालय के रूप में परिवर्तित किया जाए, जहाँ उनके जीवन, संघर्ष और आदिवासी आंदोलन से संबंधित सामग्री को प्रदर्शित किया जा सके। यह संग्रहालय भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा। साथ हीं झारखंड के शैक्षणिक पाठ्यक्रम यथा झारखंड के स्कूलो और कॉलेजो के पाठ्यक्रम में शिबू सोरेन के जीवन परिचय को शामिल किया जाए, ताकि विद्यार्थी उनके संघर्ष, नेतृत्व और आदिवासी समुदाय के प्रति उनके समर्पण से प्रेरणा ले सके।
नायक ने ईमेल में कहा है कि आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच इस अनुरोध के साथ पूर्ण समर्थन व्यक्त करता है और आशा करता है कि इस दिशा में सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। कहा कि दिवंगत शिबू सोरेन की विरासत को सम्मानित करना न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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