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नवरात्र पर अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में कन्या पूजन

एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर फुसरो में 27 सितंबर को नवरात्रि के अवसर पर नौ कन्या पूजन का आयोजन किया गया।

कन्या पूजन में मुख्य रूप से विद्यालय के सचिव अमित कुमार सिंह, विद्यालय के उपाध्यक्ष रामनरेश द्विवेदी, समिति सदस्य शंकर ठाकुर, विद्यालय के प्रधानाचार्य पंकज कुमार मिश्रा तथा विद्यालय के सभी आचार्य व् दीदी उपस्थित रहे। नवरात्र के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था और सस्कृति से ओतप्रोत पर्व का विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की बहनें माता के नौ रुपों में तैयार होकर आए। मानो विद्यालय परिसर में स्वयं माता का नौ अवतरित रुप पधारें है।

कार्यक्रम के दौरान बहनों ने क्रमशः शैलपुत्री, ब्राह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का रुप धारण किया। प्रत्येक रुप का पूजन एवं अर्चना श्रद्धा भक्ति के साथ किया गया। विद्यालय परिसर जय माता दी के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

नवरात्र का वर्णन करते हुए प्रधानाचार्य पंकज कुमार मिश्रा ने कहा कि नवरात्रि उत्सव के दौरान देवी दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों का सम्मान किया जाता है एवं उन्हें पूजा जाता है। जिसे नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्। पंचम स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।

देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती हैं और सभी नाम ग्रहण करती हैं। माँ दुर्गा के नौ रूप और हर नाम में एक दैवीय शक्ति को पहचानना ही नवरात्रि मनाना है। असीम आनन्द और हर्षोल्लास के नौ दिनों का उचित समापन बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक पर्व दशहरा मनाने के साथ होता है। नवरात्रि पर्व की 9 रातें देवी माँ के 9 विभिन्न रूपों को समर्पित है, जिसे नवदुर्गा भी कहा जाता है। अंत में विद्यालय की सभी दीदी द्वारा माता के नौ कन्यायों का पूजा- अर्चना के पश्चात् सभी उपस्थित भैया- बहनों, आचार्य दीदी एवं अभिभावकों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनानें में सभी आचार्य, दीदी एवं कर्मचारी बंधु भगिनी का योगदान रहा।

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