सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। आमतौर पर जाड़े के दिनों में ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़े पहनते हैं। कलयुग में मार्गशीरा शुक्ल पक्ष की षष्ठी से लेकर माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि (बसंत पंचमी) तक महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा को भी विशेष रुप से डिजाइन कर सर्दियों की पोशाक धारण कराया जाता है। जिसे महाप्रभुओं की घोड़ालगी वेश कहा जाता है।
पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में गुवा स्थित जगन्नाथ मन्दिर में भी इसी तर्ज़ पर 4 जनवरी को तीनों विग्रह को गरम पोशाक से सुसज्जित कराया गया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा तरह तरह का गर्म कपड़े भेंट किया गया।
मौके पर मंदिर के पुजारी जितेंद्र पंडा का कहना है कि कलयुग में भगवान जगन्नाथ मानवीय लीला रचाने आए है। इसलिए एक साधारण मनुष्य की तरह उनकी दिनचर्या होती है।
जिसके तहत मनुष्य की भांति ठंड से अपने शरीर को रक्षा करने के लिए पारंपरिक रूप से गर्म कपडे पहनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी तक अलग अलग ग्रहों के प्रतीक रंग में जगन्नाथ जी को गरम पोशाक से सुसज्जित कराया जा रहा है।
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