गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर से 30 किलोमीटर दुर सारण जिला के हद में दिघवारा अंचल के मलखाचक ग्राम के जासा सिंह क्रीड़ा मैदान में 27 नवंबर को भारतीय स्वतन्त्रता के 75 वे वर्ष अमृत महोत्सव के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक डॉ मोहन भागवत, लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामीजी महराज, भारत सरकार के मंत्री नित्यानन्द राय, नेता विरोधी दल विजय कुमार सिंह और भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया।
कार्यक्रम में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतन्त्रता आंदोलन के स्वतन्त्रता सेनानियों के परिवार को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर रविन्द्र कुमार सिंह द्वारा लिखित स्वाधीनता आन्दोलन की बिखरी कड़ियां पुस्तक का विमोचन सर संघचालक मोहन भागवत द्वारा किया गया।
उक्त पुस्तक के माध्यम से स्वतन्त्रता आंदोलन में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों और स्वतन्त्रता सेनानियों का जीवन परिचय कराया गया है। कार्यक्रम में वैशाली जिला के हद में लालगंज के विधायक संजय कुमार सिंह के साथ अन्य सांसद और विद्यायक भी मौजूद रहे।
यहां लालगंज विधायक सिंह ने कहा कि मलखाचक की धरती ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई क्रांतिवीर पैदा किए हैं। उत्तर बिहार के हाजीपुर का गांधी आश्रम जहां देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कांतिकारी आंदोलन का केंद्र था, आदि।
वही मलखाचक के क्रांतिवीर बाबू रामदेनी सिंह गांधी आश्रम के क्रांतिकारी बाबू योगेन्द्र शुक्ल, किशोरी प्रसन्न सिंह, चन्द्रमा सिंह, बसावन सिंह का एक क्रांतिकारी समूह था जो बनारस, पंजाब और बंगाल के क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े थे। ये क्रांतिकारी आजादी की लड़ाई में हथियारों की खरीद के लिये सरकारी खजानो को लूटते थे।
उन्होंने कहा कि मलखाचक के बाबू राम देनी सिंह को हाजीपुर ट्रेन लूट कांड में सन् 1930 में फांसी की सजा हुई। क्रांतिकारी योगेन्द्र शुक्ल और बसावन सिंह हाजीपुर ट्रेन लूट कांड में तो बच गए, लेकिन तिरहुत षड्यंत्र केश में योगेन्द्र शुक्ल को कालापानी और वसावन सिंह को 10 वर्ष की सजा हुई।
मलखाचक गांव क्रान्तिकारियों की शरणस्थली भी रही है। लेकिन इतिहासकारो ने बिहार के इन क्रांतिकारियों के साथ छल किया है। बाबू रामदेनी सिंह और बैकुंठ शुक्ल दोनो को गया जेल में फांसी हुई थी। रामदेनी सिंह देश की आजादी के लिये फांसी चढ़ने वाले खुदी राम बोस के बाद पहले बिहारी थे।
आयोजित कार्यक्रम में सभी लोगो ने खड़े होकर उन स्वतन्त्रता सेनानियों को याद कर नमन किया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलायी।
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