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नहाय-खाय अनुष्ठान के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू

गंगा-गंडक एवं मही नदियों में व्रतियों ने स्नान कर लिया संकल्प

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहक्षेत्र सोनपुर में नहाय – खाय के अनुष्ठान के साथ ही 25 अक्टूबर से चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू हो गया।

व्रतियों ने गंगा एवं गंडक नदियों में पवित्र स्नान एवं पूजा के संकल्प के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ किया। साथ ही, सोनपुर में छठ व्रतियों के बीच पूजन – सामग्री के वितरण का सिलसिला भी जारी है।

जानकारी के अनुसार जिला के हद में सोनपुर के नमामि गंगे घाट, पहलेजा घाट, मही नदी के अस्थाई घाटों, सबलपुर संगम स्थल के घाटों पर अहले सुबह अंधेरे से ही छठ व्रती स्नानार्थियों की भीड़ उमड़ आई थी। सोनपुर – हाजीपुर पुराना गंडक पुल हो या सोनपुर मे गज -ग्राह चौक, हर जगह भीड़ होने की वजह से जाम जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।

नहाय -खाय के अनुष्ठान के साथ ही आज से प्रत्येक छठ व्रतियों के घर में पवित्रता और सावधानी जैसे शब्दों को चार दिनों के लिए अंगीकार कर लिया गया है। छठ पर्व में प्रयोग आने वाली सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तुओं को कोई अपवित्र हाथ से छू न ले- उसे अछूता कहकर ध्यान रखा जाने लगा है। बर्तन तक अमनिया रहता है।

इस बावत छठ व्रतियों का कहना है कि देवी षष्ठी का ही प्यार का लोक नाम छठी मइया है। इन चार दिनों के दौरान चूल्हा, जलावन, गेहूं सहित सम्पूर्ण सामग्री की पवित्रता की गारंटी रखी जाती है। मिलावट के लिए कोई जगह नहीं है। इस कारण यह पर्व हमें मिलावट विहीन जिन्दगी जीने की भी प्रेरणा देती है। दूसरे दिन का पर्व खरना कहा जाता है। इस दिन मिट्टी से निर्मित चूल्हा पर खीर और रोटी बनती है।

आराध्य को समर्पित करने के उपरांत व्रती स्वयं प्रसाद ग्रहण करते है और परिजनों एवं इष्ट मित्रों को भी खिलाते है। अन्न-जल त्याग व्रत यहीं से आरम्भ हो जाता है। संध्याकालीन अर्घ्य देने का समय हो या उदयाचल सूर्य की आराधना का, सम्पूर्ण पूजा क्षेत्र दीप-धूप व अगरबत्ती की सुगंध से सुवासित हो उठता है। ऊँ भास्कराय नमः के साथ साथ छठी मइया के गीतों से माहौल पवित्र हो जाता है। छठ व्रतियों की टोली देखते ही बनता है। सभी के चेहरे पर एक सा पवित्र भाव।

पटाखे भी छूटते है तो फुलझडियां भी नयनाभिराम दृश्य उपस्थित करती है। मन्नत मानने वाली महिलाएं घर में कोसी भी भरती है। छठ पूजा स्थल पर भी कोसी भरा जाता है।
इस अवसर पर सूर्योदय से पूर्व सांध्यकालीन अर्ध्य की ही तरह व्रती महिलाएं पानी में खड़ी हो जाती है और उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान कर अपने व्रत की सफलता के लिए कृत -कृत होती है। अर्घ्य देने के बाद पूजा-स्थलों पर प्रसाद का वितरण होता है। घर लौटकर व्रतियों द्वारा पारन (प्रसाद ग्रहण) की विधि सम्पन्न की जाती है। इसी के साथ इस महाअनुष्ठान की समाप्ति होती है।

सोनपुर में छठ व्रतियों के बीच पूजन – सामग्री का वितरण

जिला के हद में सोनपुर मेला क्षेत्र स्थित माधवेंद्र कुमार सिंह उर्फ माधो सिंह सदन द्वारा 25 अक्टूबर को सैकड़ों छठ व्रतियों के बीच पूजा सामग्री का वितरण किया गया। सोनपुर मेला के प्रसिद्ध संवेदक व धर्मानुरागी समाजसेवी ज्ञानेंद्र सिंह टुनटुन एवं धर्मेंद्र सिंह मुन्ना ने अपने परिवार के साथ छठ व्रतियों के बीच आवश्यक पूजन सामग्री के रूप में साड़ी, सूप, नारियल, गागर निम्बू और अगरबत्ती आदि का वितरण किया। कोई भी व्रती खाली हाथ नहीं लौटा। उपरोक्त द्वारा प्रत्येक वर्ष इस छठ व्रत पर सभी छठ व्रतियों के बीच पूजा-सामग्री वितरित की जाती है कि कोई भी व्रती महिला पूजा से वंचित न रह जाए।

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