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खतियान आधारित स्थानीय नीति का पूर्व सांसद ने किया विरोध

झारखंड के मूल निवासियों के साथ 1932 का खतियान नीति धोखा-रविंद्र कुमार पांडेय

प्रहरी संवाददाता/फुसरो (बोकारो)। गिरिडीह के पूर्व सांसद रविंद्र कुमार पांडेय ने 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति को लेकर हेमंत सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस नीति को झारखंड के मूल निवासियों के साथ धोखा करार दिया।

इस संबंध में 17 सितंबर को पूर्व सांसद ने अपने फुसरो स्थित आवसीय कार्यालय में कहा कि यहां के मूल वासियों को हेमंत सरकार छल कर रही है। उन्होंने कहा कि 6 महीने पहले ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बयान दिया गया था कि हम इसे कैबिनेट में तो जरूर से पास कर देंगे, लेकिन कोर्ट में जाकर खत्म हो जाएगा।

पूर्व सांसद पांडेय ने सवाल किया कि आखिर अब ऐसा क्या हो गया कि उनके कैबिनेट ने सहमति जता दी। ये लोगों के साथ यह धोखा के सिवा और कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस स्थानीय नीति का फायदा ग्राउंड जीरो पर झारखंड के मूल वासियों को नहीं मिलने जा रहा है। पूर्व सांसद पांडेय के अनुसार वर्ष 1954 में मानभूम जिले से धनबाद जिला (Dhanbad District) बना। जिसका सर्वे अब तक नहीं हुआ। तो यहां के लोगों की आखिर 1932 की खतियान कहां से ला सकेंगे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सोरेन को रोजगार की बात करनी चाहिए थी। स्थानीय लोगों को नौकरी में ग्रेट बनाकर प्राथमिकता देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को डर लग रहा है और डर के कारण ही वह इस तरह का काम कर रही है।

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