पीयूष पांडेय/बड़बील (ओडिशा)। उड़ीसा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें कटक जिला के हद में काठजोड़ी नदी किनारे से अवैध रेत खनन और परिवहन का आरोप लगाया गया था।
जानकारी के अनुसार उक्त मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कटक के रहिवासियों के हितों से आंखें मूंद ली हैं।
कटक के पूर्व कलेक्टर और वर्तमान में ओडिशा के उच्च शिक्षा निदेशक भबानी शंकर चयनी उस समय मुश्किल में पड़ गए जब उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 2 दिसंबर को काठजोड़ी नदी किनारे रेत खनन पर उनके हलफनामे को झूठा करार दिया।
उक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि चयनी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। जानकारी के अनुसार उड़ीसा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें काठजोड़ी नदी किनारे से अवैध रेत खनन और परिवहन का आरोप लगाया गया था। जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कटक के रहिवासियों के हितों से आंखें मूंद ली है।
जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से हलफनामा मांगा था। प्रशासन ने कोर्ट को जवाब देते हुए कहा था कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। जो भी अवैध खनन हुआ है उसमें जुर्माना वसूला गया है।
हालाँकि, उच्च न्यायालय प्रशासन द्वारा प्रस्तुत झूठे हलफनामे से नाराज़ था और कहा कि तत्कालीन कटक जिला कलेक्टर का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस तरह का झूठा हलफनामा ऐसे जिम्मेदार अधिकारी द्वारा जमीनी हकीकत को देखे बिना दायर किया गया है, इसलिए यह अदालत मामले को बहुत गंभीरता से लेती है।
उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया कि यह देखा गया है कि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 26 अप्रैल 2019 को जारी दिशा निर्देशों के क्लॉज-सी, सब क्लॉज-IV का उल्लंघन करते हुए दिन-ब-दिन मशीनीकृत तरीके से उत्खनन/खनन कार्य के साथ किया जा रहा है। न्यायालय के इस संबंध में टिप्पणी के लिए न तो पूर्व जिला कलेक्टर चयनी और न ही वर्तमान जिला कलेक्टर उपलब्ध थे।
यहां यह उल्लेख करना उचित है कि तत्कालीन कटक कलेक्टर चयनी को 26 अक्टूबर 2023 को उच्च शिक्षा निदेशक के रूप में स्थानांतरित और तैनात किया गया था। उनकी जगह नरहरि सेठी को कटक कलेक्टर बनाया गया था।
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