नृत्य संगीत के रस में सराबोर हुआ वैशाली महोत्सव
अवध किशोर शर्मा/सोनपुर (सारण)। वैशाली महोत्सव के पहले दिन बीते 3 अप्रैल को रात्रिकालीन बेला में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय मछुआ कलाकारों की 15 सदस्यीय दल ने पारंपरिक परिधान में महावीर की जन्मभूमि बुद्ध की कर्म भूमि हो रामा चैता गायन कर दर्शकों का मन मोह लिया।
जानकारी के अनुसार वैशाली महोत्सव के प्रारंभ से यह परंम्परा चली आ रही है। यहां राकेश जैन के समूह द्वारा प्रस्तुत नृत्य नाटिका मंगलाचरण ‘अरिहंतो नमो नमो” के बाद भगवान महावीर के गर्भ कल्याणक से लेकर सभी पंच कल्याणक को नृत्य नाटिका के द्वारा प्रस्तुत किया गया।
मुंगेर के कलाकार अभिजीत आंनद ने दिल के टुकड़े टुकड़े कर के मुस्कुरा के चल दिए जाते जाते ये तो बता दे हम जिएंगे किसके लिए जैसे ही गाया दर्शक झूम उठे। उनके गाए यारा हो यारा इश्क ने मारा एवम दिल दे दिया है जान भी देंगे पर दर्शकों की खूब तालियां बजीं।
आकाशवाणी की कलाकार वीणा सिन्हा के गाने मचिया बैठल सीतल मैया नाम लेत बन जात हे मां बिगरे सब काम पर सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। उन्होंने छठ गीत काँच हीं बांस के बहंगिया लटकत जाए गाकर दर्शकों को वाह-वाह करने के लिए मजबूर कर दिया।
डॉ अंजना सरकार के कत्थक नृत्य ऊँ नमः शिवाय पर शिव स्तुति, शिव बन्दना पर कत्थक नृत्य की प्रस्तुति पर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गये।
इस अवसर पर हास्य कलाकार सौरभ सिंह ने भी हास्य की फुलझड़ियों की बरसात कर दी।
उस्ताद आमीन साबरी के साबरी ब्रदर्स के देर न हो जाय कहीं देर न हो जाये पर दर्शकों की तालियों की आवाज से पूरा पंडाल गूंज उठा। यहां एक से बढ़ कर एक गानों पर दर्शक झूम उठे। खुशबू को बड़ा शौक है तुम्हारी कसम, मैं शादीशुदा हूं कुंवारा नही हूं हास्य कलाकार सौरभ सिंह का भी धमाल रहा। एक से बढ़ कर एक गाने पर दर्शक झूम उठे।
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