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पांच फुट ऊंची प्रतिमा संगमरमर की, हंस पर बैठी हैं मां शारदे

विद्या की देवी के मंद मुस्कान से आलोकित हो रहा पहलेजा धाम

सोनपुर के पहलेजा धाम में स्थापित है देवी सरस्वती की भव्य प्रतिमा

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर के पहलेजा धाम स्थित स्वामी शरणानंद सरस्वती चंचल बाबा आश्रम में देवी सरस्वती का एक मात्र मंदिर सरस्वती पुत्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार इस मंदिर के गर्भ गृह में देवी सरस्वती की पांच फुट ऊंची संगमरमर की प्रतिमा स्थापित हैं। हंस पर बैठी मां शारदा मंद-मंद मुस्कुरा रही हैं। उनकी इस मुस्कान से सम्पूर्ण पहलेजा धाम आलोकित हो रहा है।

इस मंदिर की खासियत यह है कि वर्ष भर सुबह-शाम दो पाली में यहां मां शारदा की पूजा विधिवत तरीके से होती है। राज्य के कोने-कोने से गंगा स्नान के लिए यहां आनेवाले श्रद्धालु माता के दरबार में माथा टेके बिना वापस नहीं लौटते।
बताया जाता है में इस मंदिर में देवी सरस्वती की भव्य प्रतिमा की स्थापना सिद्ध संत योगीराज चंचल बाबा ने वर्ष 1972 में की थी।

उस समय बिहार की राजधानी पटना के बांस घाट एवं महेंद्रू घाट से पानी वाला जहाज ही पहलेजा घाट स्टेशन आने जाने का यातायात का मुख्य साधन था। 70 के दशक में चंचल बाबा ने स्वयं जयपुर के कुशल कारीगरों से मकराना पत्थर से मां शारदा की मूर्ति का निर्माण कराया था एवं शिष्यों की मदद से पहलेजा घाट लाया था। मंदिर के लिए भूमिदान पंडित रघुनाथ मिश्रा ने किया था।

मंदिर के मुख्य अर्चक हरिश्चंद्र मिश्रा उर्फ लल्लू बाबा कहते हैं कि वर्ष में शारदीय एवं चैत नवरात्र में यहां कलश स्थापित कर नवरात्र पूजा विशेष रूप से की जाती है। वैसे पूरे वर्ष भर सुबह सनातन विधि -विधान के साथ भागवती शारदा की पूजा -आरती होती है। बसंत पंचमी के दिन विधिवत तरीके से मां शारदा की पूजा की जाती है। जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता। जय सरस्वती माता के आरती गीतों से सम्पूर्ण वातावरण पवित्र बना रहता है।

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