एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखना एक राजनीतिक ढोंग और पाखंड है। यह पत्र दलित दर्द का नहीं, कांग्रेस-झामुमो गठबंधन की सड़ांध मारती विफलता को ढकने का एकमात्र पर्दा है।
उपरोक्त बाते आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने वित्त मंत्री द्वारा हेमंत सोरेन को पत्र लिखने पर 4 नवंबर को अपनी प्रतिक्रिया मे कही।
उन्होंने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार की दलित-विरोधी नीतियों का खूनी चेहरा और पूर्ववर्ती भाजपा सरकार का काला इतिहास को बेनकाब कर दिया है।
कहा कि झारखंड की हेमंत सरकार में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का मुख्यमंत्री को लिखा पत्र एक मात्र नौटंकी और राजनीतिक ढोंग भर है। यह दलितों के खून से सनी रोटियां सेंकने का कुत्सित खेल है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठकों में मुंह सिले रहने वाले तथाकथित ऐसे दलित-नेता अब मीडिया की चकाचौंध में नहाने के लिए पत्र लिखकर अपना काला चेहरा चमकाने पर उतारू हैं। यह पत्र दलित दर्द का नहीं, कांग्रेस-झामुमो गठबंधन की सड़ांध मारती विफलता को ढकने का जहरीला पर्दा है।
उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री का यह जहरीला बयान कि एससी की स्थिति एसटी से बदतर है पूरी तरह फर्जी और अवसरवादी है। नायक ने कहा कि बीजेपी शासन में एससी आयोग बना था, लेकिन वह भी कागजी शेर था। मगर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन मे तो अनुसूचित जाति आयोग पांच साल से गठन ही नही हुआ और ये टीएएसी गठन करने की बात कर रहे है, जो हास्यास्पद है।
कहा कि जो सरकार दलितों को सिर्फ हरेक क्षेत्रो मे धोखा दिया, लेकिन असली सवाल भाजपा और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार से है कि आपका प्रेम कहां था, जब आप दोनो की सरकार ने एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया? तब आप सबो का संघर्ष कहां था, जब आप दोनो के शासन में दलितों पर अत्याचार चरम पर थे? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दोनो सरकार ने ही आरक्षण को लूटा, कोटा को रिक्त छोड़ा और दलितों को भिखारी बनाया है।
अब पत्र लिखकर नाटक कर रहे है। कहा कि राज्य की हेमंत सरकार तो दलितों की कब्र खोद रही है। राज्य के 50 लाख से ज्यादा दलित भूख, गरीबी और अपमान की आग में जल रहे हैं। एससी कल्याण विभाग झामुमो के हाथ में है, लेकिन वहां से सिर्फ लूट और भ्रष्टाचार की बदबू आती है। वित्त मंत्री के पास बजट की चाबी है, फिर भी दलित योजनाएं लुटेरों की जेब में है। यह सरकार दलित-विरोधी है, जो चुनावी नौटंकी के सिवा कुछ नहीं करती। दलित समस्याओं की अनदेखी के खूनी उदाहरण सरकार और भाजपा दोनों की पोल खोलते हैं। भूमिहीनता के कारण राज्य के हरिजन, चर्मकार, भुईयां, मुसहर, घासी, धोबी समाज या कहे अनुसूचित जाति 22 उपजाति भूमिहीन, मजदूर, गुलाम बनी हुई है।
नायक ने जोर देते हुए कहा कि हेमंत सरकार की भूमि सुधार योजनाएं कागजी लाशें हैं। राज्य के पलामू-चतरा में खनन माफिया ने हजारों दलितों को बेदखल किया है। पुनर्वास? झूठ का पुलिंदा भाजपा शासन में भी यही हुआ। कॉरपोरेट को जमीन, दलितों को लाठी मिली और मुसहर एवं अन्य दलित जाति बस्तियों में 70 प्रतिशत बच्चे आन कुपोषित है।आइसीडीएस और सुपोषण अभियान सिर्फ फोटोऑप और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। राजधानी रांची के ओरमांझी ब्लॉक में वर्ष 2024 में 300 दलित बच्चे भूख से तड़पे, अस्पतालों में बेड नहीं और सरकार सोती रही। भाजपा ने भी कभी आवाज नहीं उठाई है।
दलितों कर शिक्षा व् रोजगार की लूट
नायक ने कहा कि राज्य में एससी साक्षरता दर 20 प्रतिशत से नीचे है। स्कॉलरशिप लुटेरों की जेब में और छात्रावास खाली है। कहा कि वर्ष 2024 से पटवार भर्ती में 40 प्रतिशत एससी कोटा रिक्त है, यह आरक्षण का मजाक है। चर्मकारों को शिक्षित करने के बजाय स्किल डेवलपमेंट में बकरी-मुर्गी पालन थोपा गया। भाजपा-कांग्रेस दोनों ने मिलकर आजतक दलितों को गटर में धकेला है। दोनों दलितों के दुश्मन है।
आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच घोषणा करती हैं कि राधाकृष्ण किशोर तत्काल इस्तीफा दें, अपना ढोंग बंद करें। हेमंत सरकार एससी आयोग का गठन करे। ₹ 5000 करोड़ का विशेष दलित पैकेज लाए, नहीं तो सड़क पर आग लगेगी। भाजपा अपना काला इतिहास स्वीकार करे, दलितों से माफी मांगे। सभी अत्याचार मामलों में 7 दिन में न्याय, वरना राज्यव्यापी आंदोलन होगा।
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