किसान खेत में ही छोड़ने को मजबूर हो रहे पका टमाटर
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। नोटबंदी, कोरोना काल के बाद जल जमाव से परेशान किसानों के बेहतर भविष्य की आशा में केसीसी- महाजनी कर्ज लेकर टमाटर की खेती भी काम नहीं आया। जब टमाटर तैयार हुआ तो मंडी से खरीददार गायब हैं। फलस्वरूप 4-5 रूपये टमाटर किसान को बेचना पड़ रहा है।
इससे परेशान समस्तीपुर जिले (Samastipur district) के किसानों ने या तो अपने खेत से टमाटर तोड़ना छोड़ दिया है या तोड़कर फेंक रहे हैं। उक्त बातें भाकपा माले जिला स्थायी समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने 15 अप्रैल को कही।
उन्होंने कहा कि समस्तीपुर जिला के हद में ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर वार्ड-10 में सड़क किनारे फेंका टमाटर एवं मोतीपुर सब्जी मंडी सड़क किनारे फेंका गया टमाटर देखकर जब मामले का पड़ताल किया गया तो किसान ब्रहमदेव प्रसाद सिंह ने बताया कि करीब एक रूपये किलो टमाटर तोड़ाई मजदूरी, आदि।
एक रूपये मंडी पहुंचाने का भाड़ा और एक रूपये गद्दी खर्च, जबकि 5-6 रूपये किलो उत्तम क्वालिटी का टमाटर बिकता है। इसे भी बिकने की कोई गारंटी नहीं है। कुल मिलाकर टमाटर उत्पादक किसान औंधे मुंह गिरे हैं।
माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि किसान केसीसी कर्ज- महाजनी कर्ज लेकर खेती किये थे, लेकिन टमाटर नहीं बिकने से वे परेशान हैं। अब एक ओर लोन चुकाने तथा दूसरी ओर अगली फसल लगाने की चिंता उन्हें सता रही है।
माले नेता ने कृषि अधिकारी से आग्रह किया है कि वे अच्छी कीमत में टमाटर बेचने या स्टोर में रखने की व्यवस्था के साथ बर्बाद किसानों का सरकार से केसीसी लोन माफ करने एवं आगामी फसल के लिए फसल क्षति मुआवजा, नगद राशि समेत नि:शुल्क बिजली, पानी, खाद, बीज, कृषि यंत्र देने की मांग की है।
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