Advertisement

वन्यजीवों के लिए बेहद खतरनाक है

आरे कॉलोनी के जंगल में बढ़ता प्लास्टिक कचरा

कार्यालय संवाददाता/मुंबई। गोरेगांव पूर्व परिसर के आरे मिल्क कॉलोनी में अवैध रूप से अन्य कचरों के साथ प्लास्टिक का कचरा भी फेंका जा रहा है, जो कि वन्यजीवों और जंगल की जैव विविधता के लिए बेहद खतरनाक है। बताया जाता है कि जंगल से सटी झुग्गी-झोपड़ियों से अधिकांश कचरा फेंकने की बात सामने आई है। इस मुद्दे पर प्रकृति प्रेमी व प्रणव विद्या मंदिर हाई स्कूल के संस्थापक रंजित सिंह और वन्यजीव प्रेमियों में कमलेश गुप्ता और विनोद सिंह, शशि भूषण पाण्डेय ने चेतावनी दी है कि उचित कचरा संग्रहण और निपटान व्यवस्था के बिना, यह जंगल जल्द ही कूड़ाघर में तब्दील हो जाएगा।

जोगेश्वरी निवासी, प्रकृति प्रेमी व प्रणव विद्या मंदिर हाई स्कूल (संतोष नगर) के संस्थापक रंजित सिंह और वन्यजीव प्रेमियों में कमलेश गुप्ता और विनोद सिंह, शशि भूषण पाण्डेय अक्सर आरे की तरफ आते हैं। हाल ही में जेवीएलआर के पास दुर्गा नगर की यात्रा के दौरान, जंगल के पास कूड़े और प्लास्टिक के ढेर देखकर वे दंग रह गए। कथित तौर पर आस-पास की झुग्गियों से आने वाला यह कचरा, चित्तीधारी हिरणों सहित जंगली जानवरों के लिए बेहद खतरनाक है।

जो अक्सर आहार की तलाश में इन कचरों के ढेर की ओर आकर्षित होते हैं। बड़े पैमाने पर कूड़े के ढेर और कथित अवैध झोपड़ियों के निर्माण के करण ऐसी स्थिति पैदा हो रही है। इस मुद्दे पर मनपा आयुक्त को ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) के निदेशक को कई समाजसेवकों ने पत्र लिखकर जंगल में गश्त बढ़ाने और कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

रंजित सिंह ने दैनिक दबंग दुनिया को बताया कि आरे के अंदर दुर्गा नगर के जंगल के ठीक बगल में भारी मात्रा में कचरा और प्लास्टिक का कचरा पड़ा देखा जा सकता है। इस इलाके में घरों के पीछे खुली जगहों पर अवैध कचरा फेंकने और अतिक्रमण होने के कारण पर्यावरणीय आपदा को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। चूंकि यह इलाका, जो पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील है और आरे जंगल से सीधे जुड़ा हुआ है, जो अब एसजीएनपी का हिस्सा बन गया है। बावजूद इसके हाल के महीनों में कचरे में भारी वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से यहां घरेलू कचरों का अंबर लगा हुआ है। इनमें प्लास्टिक की मात्रा अधिक है, जिसके कारण पूरा जंगल प्रदूषित हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हाल ही में एक चित्ती धारी हिरण को कचरे के ढेर से प्लास्टिक खाते देखा गया था। 2018 और 2019 में इसी तरह की घटनाओं में, हिरणों को पार्क के पास प्लास्टिक से भरे ढेर से खाना खाते हुए फिल्माया गया था।

बतादें कि प्लास्टिक जानवरों में आंतों में रुकावट, कुपोषण का कारण बनती है। इसके अलावा एक सांप प्लास्टिक की बोतल में फंसकर मौत को गले लगा लिया। बता दें कि मार्च 2025 में, मुलुंड में एक कोबरा भी बोतल के ढक्कन से घायल हो गया था। ऐसे मानव निर्मित जाल वन्यजीवों के लिए खतरनाक और मानव-पशु संघर्ष को बढ़ावा देते हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुर्गा नगर में अस्थायी पशुशालाओं और झोपड़ियों का अवैध निर्माण बढ़ रहा है, जिससे वन भूमि पर अतिक्रमण का दबाव बढ़ रहा है। आरे कॉलोनी में कचरा संग्रहण और निपटान प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

Tegs: #Extremely-dangerous-for-wildlife

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *