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सोनपुर विधानसभा में पुराने अखाड़ेबाजों के बीच जनशक्ति जनता दल व जनसुराज की इंट्री

चुनाव में नेशनलिस्ट कांग्रेस व निर्दलीय बनाएंगे मुकाबले को रोचक

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण संसदीय लोकसभा क्षेत्र के हद में सोनपुर विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन, एनडीए, जनसुराज, नेशनलिस्ट कांग्रेस और जनशक्ति जनता दल सहित आठ उम्मीदवार चुनावी दंगल में हैं। वर्तमान विधायक आरजेडी के डॉ रामानुज प्रसाद एवं एनडीए (बीजेपी) के अनुशासन समिति के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक विनय कुमार सिंह इस चुनावी दंगल के पुराने अखाड़ेबाज हैं। वे एक दूसरे को पटखनी देने के लिए मतदाताओं द्वारा निर्मित अखाड़े में जोड़ -आजमाइश कर रहे हैं। इन दोनों पर संबंधित दलों ने भरपूर विश्वास जताया है।

खास बात यह है कि राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद के बड़े लाड़ले तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल एवं प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज की पहली बार सोनपुर के चुनावी दंगल में इंट्री हुई है। इसके अलावा नेशनलिस्ट कांग्रेस, समता पार्टी व निर्दलीय भी यहां के मुकाबले को रोचक बना रहे हैं।
सोनपुर विधानसभा क्षेत्र के नयागांव थाना क्षेत्र के महमूद चक रहिवासी जनशक्ति जनता दल से आरजेडी के बागी सुरेन्द्र प्रसाद यादव हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि इन्हें तेज प्रताप यादव की पार्टी का उम्मीदवार होने का लाभ मिल सकता है। आरजेडी उम्मीदवार से परहेज करने वाले कार्यकर्ताओं पर भी उनको भरोसा है कि यह विद्रोही वोट कहीं और शिफ्ट नहीं करेगा, बल्कि उन्हें ही मिलेगा।

सोनपुर थाना क्षेत्र के चित्रसेनपुर रहिवासी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी से धर्मवीर कुमार, पहलेजा थाना क्षेत्र के सैदपुर के जन सुराज पार्टी से चंदन लाल मेहता, सोनपुर थाना क्षेत्र के सोनपुर आदम रहिवासी समता पार्टी से अजय कुमार एवं पाटलिपुत्र कॉलोनी पटना के रहिवासी निर्दलीय रमेश कुमार (राय) एवं सोनपुर थाना क्षेत्र के बबुरबानी गांव रहिवासी अवकाश प्राप्त फौजी रोहित राय प्रत्याशी हैं। इनमें रमेश कुमार (राय) निर्दलीय रूप से वर्ष 2020 में भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। वे भी स्थानीय ही हैं, पर पाटलिपुत्र में भी उन्होंने घर बना लिया हैं।

रंग बिरंगे चुनाव चिन्हों से चुनावी दंगल में उम्मीदवार

एक ओर जहां भाजपा प्रत्याशी कीचड़ में भी कमल खिलाने को तैयार हैं तो राजद अंधेरे में राह दिखाने के लिए लालटेन लिए खड़ा है। समता पार्टी प्रत्याशी ने अपने हाथ में माईक थाम रखा है।जनसुराज प्रत्याशी का चुनाव चिह्न स्कूल का बस्ता शिक्षित होने और रहने की गारंटी दे रहा है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिह्न घड़ी ऐसा लग रहा जैसे समय का कद्र करने व उसका सदुपयोग करने का मतदाताओं को संदेश दे रहा है। जन शक्ति जनता दल को मिला ब्लैक बोर्ड सिंबल मानो शिक्षा का अलख जगा रहा है। निर्दलीय रमेश कुमार को लेडी पर्स चुनाव चिह्न मिला है, जिसकी महिलाओं में प्रसिद्धि हैं। वे इसी लेडी पर्स के साथ महिला मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं। एक अन्य निर्दलीय रिटायर्ड फौजी रोहित राय ने चुनावी संग्राम का सीटी बजा दिया है।

एक दशक से सोनपुर सीट पर राजद का कब्जा, वर्ष 2010 में बने थे विनय विजेता

अभी पिछले एक दशक से सोनपुर विधानसभा सीट पर राजद का कब्जा है। वर्ष 2015 तथा 2020 के चुनाव में राजद के डॉ रामानुज प्रसाद (यादव) ने भाजपा के प्रत्याशी पूर्व विधायक विनय कुमार सिंह को शिकस्त दी थी। भाजपा के विनय सिंह को 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद की पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हराने का श्रेय प्राप्त है।

विदित हो कि वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की इस सीट पर जीत से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा हुआ था, क्योंकि इससे पहले इस सीट पर राजद का प्रभाव था। लेकिन यह प्रभाव वर्ष 2015 के सोनपुर विधानसभा चुनाव में देखने को नहीं मिला और राजद की पुनः वापसी हो गई। वर्ष 2015 के चुनाव में डॉ रामानुज प्रसाद (आरजेडी) को 86,082 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के विनय कुमार सिंह को 49,686 मतों पर ही संतोष करना पड़ा था। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के डॉ रामानुज प्रसाद यादव ने भाजपा के विनय कुमार सिंह को 6,686 वोटों के अंतर से हराकर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

विदित हो कि वर्ष 1995 के विधानसभा चुनाव में इंडिपेंडेंट चुनाव लड़कर पहली बार भाग्य आजमाने वाले डॉ रामानुज प्रसाद को उस समय महज 3469 वोट मिले थे। वर्ष 1995 और 1990 में जनता दल के राज कुमार राय ने कांग्रेस के बिरेन्द्र नारायण सिंह को हराया था। तब लोकदल (एलडी) के लालू प्रसाद 1985 में कांग्रेस के राज नारायण सिंह को हराया था। जनता पार्टी के लालू प्रसाद (सेक्युलर – चरण सिंह) ने 1980 में कांग्रेस के जवाहर प्रसाद सिंह को हराया। जनता पार्टी के रामसुंदर दास ने वर्ष 1977 में स्वतंत्र रामेश्वर प्रसाद राय को हराया।

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