रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। परंपरागत हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और शिल्पकारों की आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सहयोगिनी द्वारा एक मई को बोकारो जिला के हद में बहादुरपुर में उन्नत टूल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय की योजनाओं के अंतर्गत सहयोगिनी संस्था द्वारा संचालित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कसमार प्रखंड के 50 बांस शिल्पकारों को उन्नत टूल किट वितरित की गईं, जिससे उनकी उत्पादकता, दक्षता और शिल्प कौशल की गुणवत्ता में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
इस दौरान अपने संबोधन में रवि जान रोशन ने कहा कि, इन नए औजारों के माध्यम से शिल्पकार अब अपने कौशल को निखार सकेंगे। उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार कर सकेंगे और देवघर मेले जैसे बड़े मंचों पर आत्मविश्वास से भाग लेकर अपने शिल्प को व्यापक बाजार का अवसर प्रदान कर सकेंगे।
कहा कि इन उपकरणों का चयन शिल्पकारों की दैनिक उत्पादन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक किया गया है, जो उनकी दक्षता और शिल्पकला में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। साहयोगिनी की सचिव कल्याणी सागर ने ग्रामीण समुदायों पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले ऐसे अवसरों के सृजन में साहयोगिनी की भूमिका को रेखांकित किया, जिससे शिल्पकार अपनी पारंपरिक विधाओं को बनाए रखते हुए उन्हें आगे बढ़ा सकें।

बोकारो जिला उद्योग केंद्र के समन्वयक किशोर कुमार रजक ने वस्त्र मंत्रालय का धन्यवाद व्यक्त किया और जमीनी स्तर के शिल्पकारों को निरंतर कौशल विकास पहलों के माध्यम से सशक्त बनाने के संगठन के संकल्प को दोहराया। वितरण कार्यक्रम ने न केवल शिल्पकारों के चेहरों पर मुस्कान और आशा जगाई, बल्कि भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा की नींव को भी मजबूत किया और जमीनी स्तर पर समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान हस्तशिल्प विकास विभाग के विकास कुमार, सहयोगिनी के निदेशक गौतम सागर, रवि कुमार राय, अभय कुमार सिंह, सनी कुमार, अमरजीत कुमार सिंह, नीतू कुमारी, अशोक कुमार, अनिल कुमार आदि उपस्थित थे।
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