एस.पी.सक्सेना/गिरिडीह (झारखंड)। जैन श्वेतांबर सोसाइटी के तत्वावधान में 3 सितंबर से गिरिडीह जिला (Giridih district) के हद में मधुवन स्थित संवेत शिखर महातीर्थ पारसनाथ में आठ दिवसीय पर्वाधिराज पर्यूषण आराधना का आयोजन किया गया है। उक्त जानकारी 2 सितंबर को जैन समाज (Jain Samaj) के हरीष दोसी उर्फ राजू भाई ने दी।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर खतरगाच्छाचार्य जिनमणि प्रभाशुरिश्वरजी महाराज के अनुयायी गनिणीशद विभुषिता सुलोचनाश्री की शिष्या प्रियस्मिताश्री, साध्वी प्रियलताश्री द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म की संस्कृति में पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व का सर्वश्रेष्ठ महत्व है। इस पर्व की सच्चे दिल से, अंत:करण भाव से आराधना करने पर व्यक्ति जीव से शिव, आत्मा से परमात्मादशा की अवस्था को प्राप्त करता है।
राजू भाई के अनुसार वर्ष भर के दौरान मनसा, वाचा, कर्मणा द्वारा जो भी पाप जाने-अनजाने हुआ हो, उसकी शुद्धि हेतू इस अष्टदीवसीय शिविर में अनुष्ठान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि आराधक इस अवसर पर ब्रह्मचर्य का निर्मल पालन करेंगे। प्रातः भक्तामर प्रार्थना, पृतिकमण, सामयिक स्नानपूजा, अष्ट प्रकाटी पूजा, अंगरचना, परमात्म शक्ति, प्रवचन, संध्या प्रतिकर्मणादि के माध्यम से उत्कृष्ट आराधना करेंगे।
उन्होंने बताया कि यहां बाहर से पधारे यात्रीगण आराधना हेतू बड़ी संख्या में पधारे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यूषण महापर्व के लाभार्थी स्व मांगीलाल एवं चंचल देवी के वंशज कमलचंद, शारदा देवी बोधरा, मनीष, प्रियंका, मुकेश, माधुरी, महेंद्र, रीना, मनीषा आदि मानकचर आसाम वालो ने लिया है।
राजू भाई ने बताया कि इस पर्व को बाह्य में रंग-बिरंगी वस्त्राभुषणों से नहीं मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर पर्यूषण पांच कर्तव्य एवं 11 वार्षिक कर्तव्य पर गुरुवर्या प्रवचन में प्रकाश डालेंगे।
जिसमें अमारि प्रवर्तन, साधार्मिक, वात्सल्य आदि अहिंसा की भावना को सफलतम प्रयोग, आत्म-लेबोरेट्री में बैठकर आध्यात्म भावो को जागृत किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के राष्ट्र, संघ, समाज में सर्वत्र सर्व सुखी बने।
मंगल, कल्याण और शांति का प्रचार-प्रसार हो, सभी दु:ख कष्ट से मुक्त बने, यही मंगल अभिलाषा के साथ आत्मोत्कर्ष के रूप में उक्त पर्व मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के आयोजनकर्ता कमल सिंह रामपुरिया, अजयजी बोधरा, शिखरजी तीर्थ के ट्रस्टीगण, दिपकजी बेंगाणी, आनंदजी दूंगड़, महेशभाई आदि आराधकगण उपस्थित रहेंगे।
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