अनुमंडलाधिकारी और अन्चलाधिकारी ने किया निरीक्षण
प्रहरी संवाददाता/धनबाद(झारखंड)। झारखंड (Jharkhand) की कोयला नगरी धनबाद की धरती पर भू-माफियाओं का कारनामा किसी से छुपा नहीं रह गया है। सरकारी जमीन को सरकारी बाबुओं से ही मिलकर किस तरह उसका बंदर बांट करना है ये उन्हें अच्छी तरह ज्ञात है।
इस बार भू-माफियाओं द्वारा डीवीसी की भूमि का बंदरबाट कर लिया है।
जानकारी के अनुसार धनबाद अंचल के वार्ड नंबर 29 दुहाटांड मौजा अंतर्गत, जहां डीवीसी ने 1981 में लगभग 17 एकड़ जमीन अधिकरण किया था। उक्त जमीन पर डीवीसी स्टाफ क्वार्टर के नाम पर रैयत से 9.50 एकड़ एवं 7.50 एकड़ बिहार सरकार से लिया गया था। जिसका भुगतान डीवीसी की ओर से राज्य सरकार के कोषांग में जमा किया जा चुका है। पर हाल का सर्वे कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। दरअसल सर्वे के अनुसार अधिग्रहित जमीन का खाता नम्बर 237 और प्लॉट नम्बर 527 है। उक्त जमीन को भू-माफिया और अंचल कार्यालय के मिली भगत से कब्जा कर उसे धड़ल्ले से बेचने का काम चल रहा है। यहां तक कि जालसाजों द्वारा गलत तरीके से कागजात बनवाकर जमीन का निबंधन भी करवा दिया गया है। जिसका निरीक्षण करने 4 जून को क्षेत्र के अनुमंडल पदाधिकारी और अंचलाधिकारी खुद पहुंचे थे।
धनबाद अंचल के आमाघाटा माैजा में सरकारी जमीन कांड तो सभी को अब भी याद होगा। जहां जमीन माफियाओं द्वारा किस तरह सरकारी जमीन को कुछ सरकारी बाबुओं से मिलकर अवैध तरीके से बेच दिया गया था। जिसके बाद इसी साल मार्च में उक्त जमीन को खाली कराने गए प्रशासन को कितना विरोध का सामना करना पड़ा था। जमीन माफियाओं द्वारा एक ऐसी ही जमीन फिर से तैयार की गई है।
राज्य सरकार द्वारा स्थानीय जिला प्रशासन को इस पर कार्रवाई करने का निर्देश दिए जाने के बाद धनबाद उपायुक्त उमा शंकर सिंह ने धनबाद, बाघमारा, बलियापुर अंचल अधिकारी सहित 22 लोगों पर शोकॉज किया था। बावजूद इसके डीवीसी जमीन पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहा है। बिक्री को लेकर चर्चा यह भी है कि भू-माफियाओं द्वारा गलत कागजात बनवाने के लिए अच्छी खासी मोटी रकम का चढ़ावा भी चढ़ाया जाता है। अब उक्त जमीन पर दो दर्जन से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर बन चुका हैं। शेष बचे जमीन को भी बेंचने की कवायद की जा रही है।
इस संबंध में डीवीसी के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने बताया कि ‘यह सत्य है कि डीवीसी द्वारा 1981 में 17 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था लेकिन अंचल कार्यालय के पंजी 2 में दामोदर घाटी निगम के नाम से केवल 6 एकड़ 25 डिसमिल जमीन ही दर्शाया गया है। महाप्रबंधक ने बताया कि इस बात की शिकायत धनबाद उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अंचल पदाधिकारी से भी की गई है। जिस पर कार्रवाई चल रही है लेकिन जब तक जिला प्रशासन पूरी तरह से हमें जमीन एक्वायर करके नहीं देती, तब तक हम लोग जमीन पर कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं। इसे लेकर 4 जून को अनुमंडल पदाधिकारी सुरेन्द्र कुमार और अंचलाधिकारी प्रशांत लायक के नेतृत्व में जिला प्रशासन की एक टीम डीवीसी जमीन पर निरीक्षण करने पहुंची। इस दौरान उन्होंने बताया कि जल्द ही जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर इससे जुड़े सभी जमीन दलालों पर सख्त कानूनी कार्रवााई की जाएगी।
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