लाखों श्रद्धालुओं ने लगायी गंगा, गंडक एवं सरयू नदियों में डुबकी
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में स्थित तमाम मंदिर व् धार्मिक मठ चंद्र ग्रहण को लेकर 3 मार्च सूतक काल से चंद्र ग्रहण समाप्ति तक बंद कर दिए गये। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने सूतक काल आरम्भ से सूतक समाप्त होने के बाद संध्या बेला में गंगा, गंडक एवं सरयू नदियों में पवित्र डुबकी लगाई। संध्याकालीन बेला में बाबा हरिहरनाथ सहित सभी देव विग्रहों की भव्य श्रृंगार आरती की गयी।
जानकारी के अनुसार सूतक काल आरंभ से पूर्व सुबह 6:20 बजे सारण जिला मुख्यालय छपरा के धर्मनाथ मंदिर, दिघवारा के अंबिका भवानी मंदिर एवं सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर सहित सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। बताया जाता है कि सूतक के दौरान घरों में भोजन नहीं बनें और न किसी ने सूतक में भोजन ग्रहण किया। बच्चे, बूढ़े और बीमार इन बंदिशों से मुक्त रहे।
मार्कंडेय पुराण और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक (अशुद्धि समय) ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले प्रारंभ हो गया था। ग्रहण की समाप्ति तक सूतक रहा। इस अवधि में भोजन पकाना, भोजन करना, मूर्ति स्पर्श करना और शुभ कार्य वर्जित रहे। सूतक काल में हर जगह मंत्र जप, ध्यान और दान – पुण्य का कार्य चलता रहा।
इस संबंध में जिला के हद में सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशीलचंद्र शास्त्री, पवन शास्त्री तथा नंद बाबा ने बताया कि चन्द्रग्रहण के 9 घंटे पूर्व से सूतक प्रभावी हो गया। ग्रहण के समय सूर्य और चन्द्र की किरणें प्रभावित होती है, जिससे वातावरण में सूक्ष्म स्तर पर नकारात्मक उर्जा और विकिरण फैलते हैं। इसलिए इसे अशुभ काल माना गया है। इसी कारण भक्तों को चन्द्र ग्रहण में मन पर विशेष ध्यान केंद्रित कर भगवद स्मरण करते रहना चाहिए।
कहा कि चन्द्रमा मन का कारक है, इसलिए मन में घबराहट, बेचैनी, तनाव उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। इसलिए ग्रहण पूर्व सूतक काल से हीं मन को शांत करते हुए भगवान के दयावान स्वरूप का स्मरण करते रहना चाहिए। सूतक के दौरान भगवान के श्रीविग्रह अर्थात मूर्ति पूजा, नया कार्य, शयन और भोजन करना मना है। कहा कि रोगी, बच्चे, वृद्ध और गर्भवती महिलाओं के लिए नियम थोड़े लचीले हो सकते हैं, जिन्हें डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) का सूतक मान्य होता है। चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है। कहा कि ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस दौरान तेज धार वाली चीजों जैसे चाकू, कैंची या सुई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय आराम करना सबसे बेहतर माना गया है।
ग्रहण के दौरान खाना बनाने या खाने से बचें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें। उन्होंने कहा कि ग्रहण काल में रुद्र पूजा, महामृत्युंजय मंत्र और मूल मंत्र जो गुरुदेव द्वारा वैदिक मन्त्रोंच्चार कर दिए गए हैं का जाप एवं दान करने से धन व आयु में वृद्धि होती है और सभी पाप धुल जाते हैं। कहा कि सूतक लगने पर तुलसी के पत्ते अथवा कुशा की टहनी भोजन सामग्री (दूध, दही, पानी) में डाल दिए जाते हैं, ताकि भोज्य पदार्थ शुद्ध और पवित्र रहे।
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