एस. पी. सक्सेना/बोकारो। यदि मन में सच्ची लगन हो तो लाख बाधा भी सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकता है। इसे सच कर दिखाया है झारखंड के बोकारो रहिवासी शिवम ने। शिवम ने विषम स्थिति में भी बाधाओं को पार कर हरियाणा में दशवी कक्षा में बेहतर अंक प्राप्त की है।
बोकारो जिला के हद में गोमियां प्रखंड के एक छोटे से गांव महलीबाँध रहिवासी संतोष सिंह का पुत्र शिवम कुमार सिंह ने हरियाणा में अपनी मेहनत और लगन के बदौलत सफलता हासिल की है। शिवम ने बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा (बीएसईएच) की दसवीं बोर्ड परीक्षा में 75.2 प्रतिशत अंक हासिल कर अपने परिवार और गांव, समाज का नाम रोशन किया है।
जानकारी के अनुसार एचबीएसई हरियाणा बोर्ड की परीक्षा इस वर्ष 28 फरवरी से 19 मार्च तक आयोजित की गई थी। परीक्षा से ठीक 19 दिन पूर्व 9 फरवरी को शिवम की दादी विमला देवी का निधन हो गया था। शिवम बताते हैं कि वे तब हरियाणा में थे। गांव में हुई दादी के निधन की खबर ने उसके नन्हें हृदय को गहरा सदमा दिया था। तब पढ़ाई में मन भी नहीं लगता था। बावजूद इसके उसने हार नहीं मानी। स्कुल और पढाई बीच में छोड़कर दादी के श्राद्ध कार्यक्रम में अपने माता पिता संग झारखंड आ गए। जबकि, उसके एक दोस्त की मां ने उन्हे हरियाणा में अपने घर में रहकर परीक्षा की तैयारी करने को कहा था। पर उन्होंने कहा कि आंटी परीक्षा तो मैं अगले बार भी दे दूंगा, पर मेरी दादी अब कभी वापस लौटकर नहीं आएगी।
वह झारखंड से हरियाणा के लिए अपने चाचा के साथ 26 फरवरी को निकले और 27 फरवरी को हरियाणा पहुँचकर जमकर मेहनत कर सफलता पायी है। शिवम ने परीक्षा के एक दिन पहले झारखंड से रेल यात्रा कर हरियाणा पहुंचे थे। अगले दिन परीक्षा में भाग लिया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 75.2 प्रतिशत अंक हासिल की है। शिवम की इस उपलब्धि से उनके परिवार और गांव में खुशी की लहर है।
शिवम के पिता संतोष सिंह और माता गीता देवी अपने सुपुत्र की मेहनत और लगन की प्रशंसा कर रहे हैं।
कहते हैं कि शिवम अपनी दादी का बहुत प्रिय था। कहा कि हम सबको लगता था कि शिवम की पढ़ाई छुट गयी है। पास तो होगा पर 55-60 प्रतिशत से ज्यादा अंक नहीं ला पायेगा। शिवम के पत्रकार चाचा शिवशंकर ने कहा कि 70 प्रतिशत से अधिक अंक आने पर पसंदीदा सायकिल दिलवाएंगे। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने पर उसके चाचा ने हीरो का एक रेंजर साइकिल गिफ्ट किया है। शिवम की कहानी अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है, जिसने दिखा दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर हम अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और कड़ी मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलती है।
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