शिकायत कर्ता ने विभागीय जांच अधिकारी को भेजा लिपिक के बेगुनाही का आवेदन
सेवानिवृत कर्मी किसी के दबाव में तो नही दिया विभाग को आवेदन, जांच का विषय
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बीते कई माह पुर्व बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र के कथारा कोल वाशरी के लिपिक सुरेश ठाकुर को एक सेवानिवृत कर्मी गोपीनाथ मांझी के पे प्रोटेक्शन की राशि भुगतान के एवज में 15 हजार रुपया रिश्वत लेते धनबाद सीबीआई की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था। अधिकारी को इस मामले में सहयोग करनेवाला स्वंय कर्मी ना हो कर वाशरी के फोरमैन सह एटक से संबद्ध युनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन के सचिव रामबिलास रजवार थे।
हालांकि इस मामले पर अभी कारवाई चल रही है और मांझी सेवानिवृत्त भी हो गये हैं। उनका राशि भी भुगतान हो गया है। मगर इस मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब गोपीनाथ मांझी द्वारा विभागीय जांच अधिकारी को पत्र प्रेषित कर बताया गया कि उसे इस मामले की कोई जानकारी नहीं और ना ही लिपिक द्वारा उससे कभी भी राशि भुगतान के एवज में कोई रिश्वत की मांग की गई थी। लिपिक ठाकुर से उनके सौहार्दपूर्ण रिश्ते थे।
ऐसे में सवाल उठता है कि यह मामला वास्तव में है क्या? ज्ञात हो कि, लिपिक सुरेश ठाकुर कथारा वाशरी में सिनियर क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। कर्मियों के भुगतान के अधिकांश कागजात इन्ही के टेबल से होकर गुजरती है। मांझी का मामला भी जब लंबे समय तक इनके टेबल से आगे नही बढ़ा तो मांझी अपने पे-प्रोटेक्शन राशि भुगतान का जिम्मा युनियन नेता सह सीसीएल कर्मी रामबिलास रजवार को सौप दिया। रजवार द्वारा काफी मशक्क़त के बाद भी राशि का भुगतान नही हुआ तो लेनदेन का रास्ता चुना गया।
मगर नेताजी उक्त अधिकारी को सबक सिखाने की ठान ली और सीबीआई की टीम से सम्पर्क साधा। सीबीआई द्वारा विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए उक्त अधिकारी को रिश्वत की राशि लेते रंगे हाथों धर दबोचा और ठाकुर को अपने साथ ले गए, जो बाद में जमानत पर बाहर आ गया।
फिलवक्त इस मामले की जांच चल रही है। इधर सीसीएल मुख्यालय प्रबंधन के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा भी लिपिक के विरुद्ध जांच टीम गठित की गई। उक्त टीम व् सीसीएल के निदेशक कार्मिक एवं प्रशासन को बीते 17 अगस्त को पत्र प्रेषित कर सेवानिवृत कर्मी गोपीनाथ मांझी ने इस तरह की किसी जानकारी से अनभिज्ञता जताते हुए अपने आवेदन मे कहा कि उसे रजवार द्वारा किसी तरह की कोई जानकारी नही दी गई थी और ना ही अधिकारी द्वारा भुगतान के एवज में कभी कोई रिश्वत की ही मांग की गई थी। कहा कि उसके रिश्ते ठाकुर के साथ अच्छे है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस मामले की सच्चाई क्या है? शायद सीबीआई और विभागीय जांच पुरी होने के बाद इस बात से पर्दा उठ सके।
आरोपी लिपिक सुरेश ठाकुर का कहना है कि रामबिलास रजवार द्वारा उसे साजिश कर फंसाया गया है। उनका कहना है कि रजवार के नाम एक वन बी क्वार्टर बांध काॅलोनी मे एलॉट होते हुए भी उन्होने एक दुसरा वन बी क्वार्टर एलॉट करवा लिया था, जिसकी शिकायत उन्होंने परियोजना प्रबंधन से की थी। इसी बात से खुन्नस खाये रजवार द्वारा उनके विरुद्ध यह साजिश रच कर सुनियोजित ढंग से मुझे सीबीआई से फंसवाया गया है।वहीं शिकायतकर्ता श्रमिक नेता रामबिलास रजवार ने इस संबंध में फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि गोपीनाथ मांझी उनके यूनियन के सदस्य हैं।
जब लिपिक द्वारा उसे पे प्रोटेक्शन की राशि भुगतान करने के लिए परेशान करता रहा तो वे थक हारकर हमारे पास आया और उक्त राशि की भुगतान की जिम्मेवारी मुझे सौंपते हुए बताया कि उनकी लड़की की शादी है। इस लिए जल्द से जल्द उसका भुगतान करवा दे। इसके बाद अनेको बार वे इस मामले को लेकर लिपिक ठाकुर से मिला, मगर बिना पैसे के वह काम करने को तैयार नहीं था। आखिरकार 15 हजार मे समझौता हुआ, मगर मै रिश्वत देने के सख्त खिलाफ था।
इसी कारण मै सीबीआई की शरण में गया और सीबीआई द्वारा रंगे हाथों लिपिक को पकड़ा भी गया। विभागीय जांच टीम को गोपीनाथ मांझी के द्वारा दिये पत्र के संबंध में उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वह किसी दबाव में आकर या प्रलोभन मे आकर यह कदम उठाया हो। लेकिन सच सबके सामने उसी समय आ गया था जब सीबीआई ने लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। कहा कि क्वार्टर एलोटमेंट का मामला प्रबंधन से था लिपिक से इस मामले में कोई लेना-देना नहीं है।
सवाल उठता है कि जिस कर्मी की राशि भुगतान को लेकर यह पुरा मामला हुआ, अगर वही विभागीय जांच टीम को पत्र लिखकर लिपिक को बेगुनाह साबित कर रहा हो तो तीसरे मुख्य कैरेक्टर आरोपी लिपिक पर कई प्रश्न खड़े करता है जो शायद सीबीआई और विभागीय जांच टीम के फैसले के बाद ही सामने आयेगा। सेवानिवृत कर्मी गोपीनाथ मांझी के दिये उक्त आवेदन ने इस पुरे मामले में नया व नाटकीय मोड़ पैदा कर दिया है।
![]()













Leave a Reply