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हिंदी रंगमंच दिवस पर विभिन्न संस्थाओं के नाट्यकर्मियों द्वारा नाटक का मंचन

ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर वीर कुंवर सिंह चौक पर गिरिडीह शहर के विभिन्न संस्थाओं के नाट्य कर्मी अपने नाटकों का मंचन किया। नाटक बीते 3 अप्रैल की संध्या सात बजे से देर रात नौ बजे तक चला।

नाट्य कार्यक्रम में शहर के विद्वान, साहित्यकार, कलमकार, समाजसेवी उपस्थित थे। कार्यक्रम के शुरुआत में गिरिडीह कॉलेज के डॉ बलभद्र सिंह, शंकर पांडेय, रितेश सराक, बबलू मंजरवे तथा महेश अमन ने हिंदी रंगमंच दिवस की सार्थकता पर अपनी बातें रखी।
इसके बाद इप्टा गिरिडीह द्वारा एक नाटक का मंचन किया गया।

जिसका निर्देशन महेश अमन ने किया। जिसे दर्शकों ने काफी सराहा। सांस्कृतिक संस्था आग की ओर से एक नुक्कड़ नाटक मंचित की गई जो पानी की किल्लत पर आधारित थी। अंत में त्रिमूर्ति के निर्देशक वरिष्ठ रंगकर्मी प्रदीप गुप्ता ने चर्चित एकल अभिनय मैं भी रोहित वेमुला का गंभीरता से मंचन किया, जिसे नुक्कड़ पर उपस्थित दर्शकों ने काफी सराहा।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन सामाजिक चिंतक शंकर पांडेय ने किया। उन्होंने कहा कि नुक्कड़ नाटकों का पुराना इतिहास रहा है, जो जन मुद्दों पर सीधे जनता के पास जाकर उन्हें जागृत करने का काम करता है। उन्होंने कहा कि गिरिडीह में इस परंपरा को आइना के कलाकारों ने जीवित रखा है। इससे प्रेरित होकर अन्य संस्थाएं भी आगे आ रही है, जो शहर के लिए लाभकारी है।

इस अवसर पर उपस्थित दर्शकों ने कहा कि गिरिडीह शहर में नाटक मंचन के लिए कोई प्रेक्षागृह नहीं है। नगर निगम को चाहिए कि गिरिडीह में कला के संरक्षण के लिए एक ऑडिटोरियम का निर्माण कराए, जहां कम शुल्क पर कलाकार अपनी कला का मंचन स्वतंत्र रूप से कर सके।

इस कार्यक्रम में कलाकार के रूप में उत्तम, कवींद्र, आदित्य, गुड्डू, ऋषभ, तरुण, प्रगति, रानी, राहुल, रौनक, रंजन, पंकज शामिल थे तथा दर्शकों में कुंवर सिंह समिति के विष्णु सिंह, भोला सिंह, दारा सहित सैकड़ों दर्शक मौजूद थे। इस कार्यक्रम में आईना, आग, इप्टा तथा त्रिमूर्ति के कलाकारों ने नाटक का मंचन किया।

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