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दुर्गोत्सव के रंग में रंगा डीपीएस बोकारो, आकर्षक प्रस्तुतियों से बच्चों ने मोहा

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। शारदीय नवरात्रि को लेकर चहुं ओर छाए उमंग के बीच दिल्ली पब्लिक स्कूल बोकारो भी दुर्गोत्सव के रंग में रंगा है। इस उत्सवमय माहौल में एक विशेष आयोजन के तहत विद्यार्थियों ने श्रद्धा, भक्ति, कला और रचनात्मकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

बताया जाता है कि डीपीएस के बच्चों ने नृत्य, गीत-संगीत, रूप-सज्जा जैसे कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की। विद्यार्थियों को देश की समृद्ध परंपरा तथा दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व समझाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत नर्सरी कक्षा के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत दुर्गा वंदना से की गयी। इस मधुर और भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण में भक्ति रस घोल दिया। देवी दुर्गा और भक्तों के रूप में नन्हे विद्यार्थियों की भाव-भंगिमा देखते ही बन रही थी।

इस अवसर पर विद्यालय के कक्षा पांच के विद्यार्थियों ने दुर्गा अमृतवाणी का सुमधुर पाठ प्रस्तुत किया। उत्सव का मुख्य आकर्षण कक्षा दो के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक गरबा नृत्य रहा, जिसमें उन्होंने शिक्षकों को भी साथ झूमने पर विवश कर दिया।

यहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अलावा, विद्यार्थियों ने कई रचनात्मक गतिविधियों में भी भाग लिया। कक्षा चार और पांच के विद्यार्थियों ने देवी दुर्गा के मुखौटे और तोरण (सजावटी द्वार) बनाए, जबकि कक्षा दो और तीन के छात्र-छात्राओं ने नवदुर्गा की वॉल हैंगिंग्स तैयार कीं। उन्होंने देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री से संबंधित आकर्षक कलाकृतियां बनाईंं। दुर्गा पूजा थीम पर विद्यालय परिसर की साज-सज्जा भी आकर्षक बनी रही।

इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ ए. एस. गंगवार ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ना और उनमें सामुदायिक सद्भाव की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ी संस्कारवान व चरित्रवान बने, इसके लिए उन्हें अपनी सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत की जड़ों से जोड़े रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि शक्ति-आराधना का उत्सव है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और आत्मशक्ति-जागरण का संदेश देता है।

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