डीएमएमयू में फोस्टर व् आफ्टर केयर विषय पर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले सभी बच्चों को परिवार का स्नेह, सुरक्षा और अपनापन उपलब्ध कराने तथा 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर संस्थागत देखभाल से बाहर आने वाले बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बोकारो में मिशन वात्सल्य के तहत फोस्टर केयर एवं आफ्टर केयर कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को उच्च शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार के अवसर, आवासीय सहायता एवं जीवन कौशल से जोड़कर उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सक्षम बनाया जाता है, ताकि वे सुरक्षित, स्वावलंबी और सशक्त नागरिक बन सकें।
इसी उद्देश्य से बोकारो जिले में मिशन वात्सल्य के तहत फोस्टर केयर एवं आफ्टर केयर कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस पहल को सामाजिक सुरक्षा विभाग एवं जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) द्वारा लागू किया जा रहा है। कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जेएसएलपीएस, यूनिसेफ तथा सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (एनयूएसआरएल) द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे इसकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता को नई दिशा मिल रही है।
इसी पहल के अंतर्गत 25 फरवरी को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) बोकारो द्वारा प्रशिक्षण हॉल डीएमएमयू में फोस्टर केयर एवं आफ्टर केयर विषय पर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जेएसएलपीएस के बीपीएम, बीएपी, आईपीआरपी एवं जिला टीम के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
बोकारो के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) अनिल डुंगडुंग ने उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कहा कि फोस्टर केयर एवं आफ्टर केयर की जानकारी जेएसएलपीएस के माध्यम से प्रत्येक परिवार तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जेंडर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन इस अभियान की रीढ़ बनेंगे। कहा कि मार्च माह से सभी प्रखंडों में उन्मुखीकरण सह जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिससे समुदाय स्तर पर व्यापक जागरूकता सुनिश्चित हो सके।
उन्मुखीकरण सत्र का संचालन सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स जिला तकनीकी विशेषज्ञ विनय कुमार बिश्वास एवं संरक्षण अधिकारी, गैर संस्थागत देखभाल डीसीपीयू बोकारो अजीत राणा द्वारा किया गया। उन्होंने फोस्टर केयर की प्रक्रिया, पात्रता, चयन एवं आफ्टर केयर के तहत बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान कर विषय को और अधिक स्पष्ट किया।
ज्ञात हो कि, उक्त कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को इन योजनाओं की गहराई से समझ प्रदान करना था, ताकि जरूरतमंद बच्चों को संस्थागत जीवन के बजाय पारिवारिक माहौल में बेहतर देखभाल मिल सके। विशेषज्ञों ने बताया कि फोस्टर केयर बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रभावी माध्यम है, जो उन्हें भावनात्मक सुरक्षा और सामाजिक स्वीकृति प्रदान करता है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जेएसएलपीएस के जिला मिशन प्रबंधक (डीएम-एसडी) अतुल मिंज की भूमिका सराहनीय रही। उनके कुशल मार्गदर्शन और समन्वय से यह कार्यक्रम प्रभावी रूप से संपन्न हुआ। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी सभी प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम उनके ही मार्गदर्शन में आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी बताया और जमीनी स्तर पर इसे लागू करने का संकल्प लिया। सभी ने भरोसा दिलाया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में समुदाय को जागरूक कर अधिक से अधिक बच्चों को इन योजनाओं से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यह उन्मुखीकरण कार्यक्रम न केवल एक प्रशिक्षण सत्र रहा, बल्कि बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहपूर्ण भविष्य की दिशा में मजबूत पहल बनकर उभरा है।
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