एन.के.सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में बेरमो अनुमंडल क्षेत्र में सीसीएल की ढोरी, बीएंडके और कथारा क्षेत्र के खदानों में दशकों से चल रही कोयला चोरी अब शिष्टाचार हो गई है।
कोयला चोरी से परिक्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों परिवारों का भरण पोषण होता है। इसमें बच्चे बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल रहती हैं। इससे बच्चों की जिंदगी बर्बाद हो रही है।
तीन दशक से अधिक समय से चल रहे इस कार्य में इन परिवारों की दूसरी पीढ़ी अब युवावस्था को प्राप्त कर चुकी है। आलम यह है कि चंद दिनों कोयला की तस्करी बंद होने पर क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं में एकाएक वृद्धि देखी जाने लगती है।
मामले पर गौर करें तो प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग सीसीएल की बेरमो कोयलांचल के परियोजनाओं की खुली खदान में प्रवेश कर अपने बच्चों के साथ कोयला चुनने में जुट जाते हैं। यह बच्चे अपने परिजनों के सहयोग में अपनी पूरी जिंदगी लगा रहे हैं।
चुने गए कोयले को पास में जमा कर प्रतिदिन आने वाले हजारों की संख्या में साइकिल (Cycle) से कोयला ढोने वालों को बेच दिया जाता है। जानकारी के अनुसार साइकिल सवार स्थानीय पुलिस प्रशासन को राशि देकर बड़े आराम से स्थानीय बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में बनाए गए कोयला डिपो को कोयला बेच देते हैं।
यह कार्य लंबे समय से यहां बदस्तूर चल रहा है। न तो इस ओर जिला प्रशासन सख्ती बरत रही है, ना ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ही मामले पर गंभीर हैं। ऐसे में इन बच्चों के सामने किताबों का होना महज एक स्वप्न हो चुका है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत भी इन बच्चों को शिक्षा से अब तक नहीं जोड़ा जा सका है।
स्थानीय दर्जनों रहिवासी बताते हैं कि कोयला जलावन के लिए कोई वैधानिक व्यवस्था नहीं होने के कारण ही यह कार्य चल रहा है। परियोजना प्रबंधन द्वारा जलावन के कोयले के लिए विधिवत कोई बिक्री करने का नियम नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि इस कोयले की तस्करी में स्थानीय पुलिस प्रशासन साइकिल सवारों से भारी रकम लेकर इन्हें थाना क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दे रहे है।
वहीं परियोजना के खनन क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेवारी संभालने वाली केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की भी भूमिका संदिग्ध दिख रही है। ऐसे में आवश्यकता है कि जल्द ही इस अराजक कोयला तस्करी के कार्य को रोकने की पहल शुरू हो, ताकि राज्य सरकार (state Government) और देश का विकास हो।
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