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बर्ड फ्लू से डरें नहीं सावधानी बरतें-उपायुक्त

एस. ली. सक्सेना/बोकारो। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा बर्ड फ्लू को लेकर गाइड लाइन जारी किया गया है।

बोकारो जिला उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने जिलावासियों से जारी गाइडलाइन का अनुपालन करने एवं प्रशासन का सहयोग करने की बात कहीं है। उन्होंने कहा है कि बोकारो जिला प्रशासन बर्ड फ्लू का मामला पुष्टि होने के बाद से ही केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को सुनिश्चित कर रहा है।

इसके तहत कहा गया कि बर्ड फ्लू मुख्यतः मुर्गियों का अत्यन्त संक्रामक रोग है। संक्रमित पक्षी अथवा मुर्गी के सम्पर्क में जाने से यह संक्रमण मनुष्यों में भी फैल सकता है। बर्ड फ्लू अत्यन्त संक्रामक वायरस (H5N1) जनित रोग है।

मनुष्यों में बर्ड फ्लू के लक्षण साधारण फ्लू से मिलते-जुलते हैं, जैसे सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार, जुकाम और नाक बहना। इस तरह की समस्या होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में इसकी सूचना दें।

कहा गया कि सामान्यतः बर्ड फ्लू का वायरस 70 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर नष्ट हो जाता है। किसी स्थान पर बर्ड फ्लू रोग की पुष्टि होने के बावजूद अण्डे व चिकेन 70 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान तक पकाकर खाने में कोई नुकसान नहीं है।

उन्होंने कहा कि बीमार मुर्गियों के सीधे सम्पर्क में न आयें। दास्ताने या किसी भी अन्य सुरक्षा साधन (मास्क) का इस्तेमाल करें। बीमार पक्षियों के पंख, श्लेश्मा (म्यूकस) और बीट न छूयें। छू जाने की स्थिति में साबुन से तुरंत अच्छे तरीके से हाथ धोयें।

संक्रमित पक्षियों अथवा मुर्गियों को मारने के बाद उनका सुरक्षित निपटारा करें। बीमार अथवा मरे हुए पक्षी की सूचना तुरन्त निकटतम पशुपालन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को दें। ऐसा करना जन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

कहा गया कि अपने पक्षियों एवं मुर्गियों पर नजर रखें। यदि पक्षियों अथवा मुर्गियों की आँखों, गर्दन और सिर के आस-पास सूजन है। आँखों से रिसाव हो रहा है। कलगी और टांगों में नीलापन आ रहा है। अचानक कमजोरी, पंख गिरना गढ़ रहा है और हरकत में कमी आ रही है, कम आहार ले रहे हैं तथा सामान्य से अधिक संख्या में इनकी मृत्यु हो रही हो तो यह सब खतड़े के संकेत हैं।

कहा गया कि पक्षियों एवं मुर्गियों में ऐसे असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं तो इसे छिपाये नहीं, क्योंकि यह आपके परिवार तथा समाज के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। लक्षण मिलने पर जिले के नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों से सम्पर्क करें।

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