राम चरित्र मानस पाठ एवं महायज्ञ मे श्रीराम का राज्याभिषेक के साथ पूर्णाहुति
एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के करगली गेट में मानस सत्संग समिति बेरमो द्वारा 67वाँ नवाहन श्रीश्री राम चरित्र मानस पाठ एवं महायज्ञ 7 मार्च को प्रभु श्रीरामचंद्र के राज्याभिषेक के साथ पूर्णाहुति किया गया।
इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। साथ ही मर्यादा पुरषोत्तम श्रीरामचंद्र की जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। यज्ञ के अंतिम दिन राज्याभिषेक के उपरांत आरती और प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु यज्ञ परिसर का परिक्रमा कर पूजा-अर्चना किया।
जानकारी के अनुसार 8 मार्च को हवन और संध्या 4 बजे शोभा यात्रा निकाल मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। यह 67वां मानस महायज्ञ मिथिलाकुंज अयोध्या से आये मानस मर्मज्ञ वैष्णव संतस्वामी पूज्य यज्ञाचार्य श्रीश्री 1008 राम बिहारी शरण जी महाराज की अध्यक्षता मे संपन्न हुआ। यज्ञ में जमुई मुंगेर बिहार से पधारे पूज्य सदानंद मिश्रा तथा उनकी टीम के द्वारा रामचरित मानस पाठ कराने से करगली गेट सहित आस पास का क्षेत्र भक्तिमय हो गया। बैधनाथ धाम देवघर से पधारे परम पूज्य पंडित मिथिलेश मोदगल्य ने सभी नौ दिन रामचरित मानस का पाठ करवाया। सैकड़ो की संख्या में श्रद्धांलू यज्ञ परिसर में बैठकर रामचरितमानस पाठ का श्रवण किया।
वही बीते 6 मार्च की रात्रि यज्ञ के आठवां दिन उज्जैन से पधारे श्रीश्री लोकेशानन्द शास्त्री जी ने प्रवचन के द्वारा श्रीराम केवट प्रसंग का सुन्दर चित्रण किया। उन्होंने कहा कि कोई भी काम निडर होकर करना चाहिए, डरना नहीं चाहिए। हमेशा अपनी मंजिल की ओर बढ़ते रहें। कुछ ना भी मिला तो तजुर्बा और अनुभव तो जरूर मिलेगा। डर से हमेशा काम बिगड़ता है। कहा कि चिंतन कीजिए चिंता मत कीजिए। जब भगवान श्रीराम अपनी अर्धांगिनी माता सीता, भाई लक्ष्मण के साथ गंगा नदी पार करने के लिए गए तो वहा नाविक केवट ने अपनी चतुरता का परिचय दिया।

भगवान खुद केवट के पास गए। भगवान श्रीराम ने केवट को गंगा नदी पार कराने को कहा तो केवट ने नदी पार कराने से मना कर दिया। केवट ने कहा कि मैं आपके बारे में सुन रखा है। आपकी चरण की धूल मात्र से ही एक पत्थर की शीला कन्या बन जाती है, तो मेरा तो नाव लकड़ी का है। इसका क्या हाल होगा। इस कारण पहले मैं आपकी चरण धोऊंगा, उसके बाद नाव से नदी पार करवाऊंगा।
उन्होंने कहा कि केवट अपनी पत्नी के साथ श्रीराम के एक चरण धोए। दूसरा चरण धोते वक्त भगवान को पहला चरण फिर जमीन पर रखना पड़ा। इस पर केवट ने चतुराता का परिचय देते हुए कहा कि जब एक चरण धोऊंगा तो पहला चरण ऊपर उठाकर रखना होगा। भगवान उसकी सारी चतुराता समझते हुए कहें कि इससे तो मैं गिर जाऊंगा। इस पर केवट ने कहा कि आप दोनों हाथ मेरे सिर पर रख ले इससे आप नहीं गिरेंगे। भगवान ने अपने दोनों हाथ केवट के सिर पर रख दिए। इससे केवट ने भगवान का आशीर्वाद भी प्राप्त कर लिया।
मौके पर यज्ञ के स्वागतध्यक्ष मनोज सिंह और सुशील सिंह, नितेश सिंह, अर्चना सिंह तथा निरंजन सिंह उर्फ रंजू ने श्रद्धालुओं से आग्रह करते हुए कहा कि 8 मार्च को सुबह में हवन किया जाएगा। संध्या 4 बजे शोभा यात्रा निकाली जाएगी। शोभा यात्रा में अधिक से अधिक श्रद्धालु शामिल हो।
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