सत्ता के संघर्ष में पिछड़े वर्गों का शिकार न करें-माने

शिंदे सरकार से धारावी के पूर्व विधायक की मांग

प्रहरी संवाददाता/मुंबई। शिवसेना पार्टी (Shivsena Party) प्रमुख उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद, राज्य (State) में सत्ता में आई शिंदे-फडणवीस सरकार (Government) ने महा विकास अघाड़ी सरकार द्वारा लिए गए सभी फैसलों को रद्द कर दिया है, जिसमें ठाकरे द्वारा लिए गए निर्णय भी शामिल हैं। जनहित के फैसलों को रद्द होने से शिवसेना के पूर्व विधायक (MLA) एवं सामाजिक न्याय विभाग बाबूराव माने ने नाराजगी व्यक्त किया है।

माने ने अपील किया है कि राज्य में उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में पिछड़े वर्ग जो सत्ता के इस आवंटन में पहले से ही उपेक्षित रहे हैं, उन्हें इसका शिकार न बनाया जाए और इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।

राज्य में महा विकास अघाड़ी सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग समेत प्रदेश की जनता के लिए कई बड़े फैसले लिए। जिसे नवगठित शिंदे फडणवीस सरकार ने या तो रोक दिया या फिर रद्द कर दिया। इनमें सामाजिक न्याय विभाग द्वारा राज्य के पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए, लिए गए फैसलों को भी शामिल किया गया।

पूर्व विधायक बाबूराव माने ने सरकार की इस कार्रवाई पर खेद व्यक्त किया है। भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ के विकास के मामले में राज्य टोल एससी-एसटी (SC ST) को पदोन्नति, छात्रवृत्ति, विदेशी छात्रवृत्ति, हजारों कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों की वापसी, आरक्षण, विकास महाविकास अघाड़ी के माध्यम से इंदु मिल स्मारक, कार्यवाही चल रही थी।

सत्ता के हस्तांतरण से पहले भी सामाजिक न्याय विभाग ने कुछ निर्णय लिए थे, लेकिन उम्मीद थी कि सरकार अन्य विभागों के निर्णयों को रद्द करते हुए सामाजिक न्याय विभाग के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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