यज्ञशाला में श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञ प्रारंभ, हजारों भक्तों ने किया परिक्रमा
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला की हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश नौलखा मंदिर के यज्ञशाला में भीष्म पंचक एवं देवोत्थान एकादशी के अवसर पर 2 नवंबर को अरणी मंथन कर यज्ञ की अग्नि प्रज्ज्वलित किया गया।
श्रीगजेन्द्र मोक्ष देव स्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य एवं बाबा हरिहरनाथ मंदिर के पुजारी पंडित पवन शास्त्री सहित विद्वान ब्राह्मणों ने वेद मंत्रों के बीच अरणी मंथन कर यज्ञ की अग्नि प्रज्ज्वलित किया। अग्नि प्रज्ज्वलित होते ही विधिवत वैदिक विधि विधान के साथ श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञ प्रारंभ हो गया। इस दौरान सम्पूर्ण नारायणी नदी का किनारा एवं यज्ञशाला भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण के जय जयकार से गूंज उठा।
इस अवसर पर दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। इस दौरान गंगा मैया और नारायणी मईया की जय जयकार से पूरा मंडप गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने देवस्थानम के विशाल राजगोपुरम, भगवान गरुड़ देव, गरुड़ ध्वज, त्रिदंडी स्वामी का भी दर्शन किया। राजगोपुरम के सामने श्रीमन्नारायण भक्त व सखा गरूड़ देव की बद्धांजलि मुद्रा में खड़ी प्रतिमा को देख श्रद्धालु नतमस्तक हो गए। गरुड़ देव की विनम्रता, सौम्यता व शालीनता का सूचक इस मुद्रा को भक्तों ने अपने कैमरे में भी कैद किया।
यहां गरुड़देव भगवद्भक्ति में तल्लीन हैं। श्रद्धालुओं ने जगमोहन के गर्भगृह में स्थित भगवान श्रीबालाजी वेंकटेश रंगनाथ श्रीविष्णु, श्रीदेवी, भू -देवी, लक्ष्मी देवी एवं आल्वार संतों की अलग-अलग विग्रहों की भी भक्ति भाव से आराधना और पूजा किया। उपरोक्त सभी देव विभूतियों का अपने भक्तों पर सदा आशीर्वाद बरसता रहता है। सर्वत्र शांति मंगलकामना व श्रीवृद्धि के लिए शुरू इस यज्ञ से मेले के सुखद भविष्य के साथ-साथ स्थानीय रहिवासियों व तीर्थयात्रियों, व्यवसायियों, सुरक्षा प्रहरियों के लिए मंगलकामना का संदेश दे रहा है।
हवन में प्रयुक्त अग्नि देवता के आह्वान का प्रतीक है पवित्र अरणी मंथन-स्वामी लक्ष्मणाचार्य
हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने यहां कहा कि श्रीरामानुज सम्प्रदाय के यज्ञों में अरणी मंथन का आध्यात्मिक महत्व है। कहा कि यह पवित्र अग्नि उत्पन्न करने की वैदिक प्रक्रिया है, जो अग्नि देवता का आह्वान और दिव्य अग्नि का प्रज्वलन दर्शाती है। यह विधि घर्षण द्वारा चिंगारी उत्पन्न करने के वैदिक सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उपयोग यज्ञों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पवित्र और शुभ अग्नि प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह हवन में प्रयुक्त अग्नि देवता के आह्वान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र अग्नि का उद्भव अरणी मंथन से होता ह, जो लकड़ी के घर्षण से अग्नि उत्पन्न करता है।
उन्होंने कहा कि अरणी मंथन प्रक्रिया अग्नि देवता, अग्नि को यज्ञ अनुष्ठान में आमंत्रित करने का प्रतीक है। इसके माध्यम से उनका आह्वान किया जाता है। इससे उत्पन्न अग्नि शुभ और पवित्र होता है। कर्मकांड की पूर्णता: यह विधि यज्ञ की पूर्णता का एक हिस्सा है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि यज्ञ को आध्यात्मिक शुद्धि और परमात्मा के साथ संबंध स्थापित करने की यह प्रक्रिया है। अरणी मंथन से उत्पन्न पवित्र अग्नि यज्ञ की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और परमात्मा की कृपा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
![]()













Leave a Reply