अधिकारियों व् जन प्रतिनिधियों को बैठक में समय का भान नहीं
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला मुख्यालय कैंप टू स्थित न्याय सदन सभागार में 19 जुलाई को जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक का आयोजन किया गया।अध्यक्षता गिरिडीह सांसद ने की।
दिशा की बैठक में धनबाद के सांसद, बोकारो विधायक, गोमियां विधायक के अलावा चंदनकियारी, बेरमो विधायक प्रतिनिधि, बोकारो जिला उपायुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला परिषद अध्यक्षा, उप विकास आयुक्त, निदेशक डीपीएलआर, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी चास तथा बेरमो, सिविल सर्जन, सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रमुख व् अन्य उपस्थित थे।

जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार न्याय सदन में 19 जुलाई को निर्धारित समय ग्यारह बजे से दिशा की बैठक का आयोजन होना था। बावजूद इसके बैठक डेढ़ घंटा विलंब से लगभग दोपहर 12:30 बजे आरंभ किया गया। संभवतः अधिकारियों को दिशा की बैठक में समय का ज्ञान नहीं था। और तो और इस बैठक में जनप्रतिनिधि भी (गोमियां विधायक डॉ लंबोदर महतो तथा जिप अध्यक्षा सुनीता देवी को छोड़कर) नौकरशाहों के पैटर्न को अपनाते दिखे।
दिशा की बैठक से मीडियाकर्मी को दुर रखा गया
बोकारो जिला मुख्यालय स्थित न्याय सदन में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में जिला प्रशासन द्वारा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सारे पत्रकारों को समाचार संकलन के लिए आमंत्रित भी किया गया।
बैठक का निर्धारित समय था ग्यारह बजे सुबह लेकिन एकमात्र गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो तथा जिला परिषद अध्यक्षा सुनीता देवी के अलावे सारे माननीय पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के आते-आते साढ़े बारह बज गए।
बहरहाल, कार्यक्रम की औपचारिकताएँ पुरी कर बैठक की शुरुआत की गई। यहां उपस्थित पत्रकारों ने बड़े जोश में मानिन्दों की फोटो खींचनी शुरु की। फोटो सेशन पुरा होते ही घोषणा की गयी कि अब बैठक की शुरुआत होनेवाली है जिसमें अहम् विषयों पर चर्चा होगी।अतः सारे मीडियाकर्मियों से आग्रह है कि वे सभागार से बाहर प्रस्थान करें।
बेचारे मीडियाकर्मी मायूस होकर सभागार से निकल लिए। सभाकक्ष से बाहर आकर मिडियाकर्मियों ने जिला प्रशासन को जमकर कोसा।कुछ मीडियाकर्मियों ने बैठक का बायकॉट करने की घोषणा की और जिला प्रशासन की ओर से किए गए खाने-पीने की व्यवस्था से पुरी तरह परहेज किया। और तो और जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराये गए मिष्ठान अथवा नास्ता के पैकेट लेने से भी खुद को दुर रखा।
इससे ज्यादा मिडियाकर्मी कर भी क्या सकते थे। बहरहाल दिशा की बैठक में जिला प्रशासन ने पत्रकारों को पुरी तरह उपेक्षित किया। सारांश यह कि जिले के विकास से संबंधित योजनाओं व डीएमएफटी फंड के उपयोग से संबंधित परिचर्चाओं की मीडियाकर्मियों को भनक तक नहीं लगने दी गई।
इस बैठक में खास बात यह देखने को मिली कि यहाँ एनडीए (आजसू, भाजपा) के सारे जनप्रतिनिधियों की दमदार मौजूदगी थी और इंडिया गठबंधन (जेएमएम, काँग्रेस) के जनप्रतिनिधि नदारद थे। खानापूर्ति के लिए उन्होंने अपनी जगह अपने प्रतिनिधियों को भेज दिया था।
अब आगे एनडीए (आजसू व भाजपा) के विधायक, सांसद व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने विकास योजनाओं और तमाम फंडों का उचित उपयोग करने का प्रस्ताव पारित किया या फिर बंटाधार किया ये तो वो ही जानें। अपन तो इस मामले में अनभिज्ञ हैं।
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