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पंचतत्व में विलीन हो गए झारखंड आंदोलन के महानायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन

पुत्र हेमंत सोरेन ने पिता को दी मुखाग्नि

एस. पी. सक्सेना/रामगढ़ (झारखंड)। और देखते देखते पंचतत्व में विलीन हो गए झारखंड आंदोलन व् निर्माण के महानायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन। रामगढ़ जिला के हद में नेमरा में पारंपरिक रीति-रिवाज से उस मसीहा का अंतिम संस्कार किया गया। हज़ारों नम आंखों ने अपने चहेते मसीहा को अंतिम विदाई दी।

जिसने कभी भी अपने गांव की मिट्टी को नहीं भूल पाया, आज उस गांव के हज़ारों ग्रामीणों के जुबान से यही निकल रहा था कि अब कोई शिबू सोरेन जैसा नेता नहीं बन पाएगा। जीवन के कई झंझावतों को पार कर अलग राज्य की स्थापना करानेवाले वीर सपूत को अंतिम जोहार करने के लिए अपार भीड़ उनके गांव नेमरा में एकत्रित थी। हज़ारों नम आंखों के बीच सामाजिक न्याय और झारखंड निर्माण के महानायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन आख़िरकार पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पैतृक आवास नेमरा टोला के मुक्तिधाम में हज़ारों रहिवासियों, मंत्रियों, राजनेताओं तथा आम व् खास ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

ज्ञात हो कि, बीते 4 अगस्त की अहले सुबह दिशोम गुरु शिबू सोरेन की इलाज के क्रम में दिल्ली के गुरुग्राम स्थित सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया था। इसमके बाद 5 अगस्त को उनके पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से रांची से रामगढ़, गोला, बरलंगा होते हुए नेमरा लाया गया। जिस वाहन से उन्हें लाया जा रहा था, उसमें दिवंगत के पुत्र सह राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बैठे थे। दिवंगत शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को उनके आवास के आंगन में रखा गया, जहां पारम्परिक रीति-रिवाज से अंतिम यात्रा के लिए उन्हें विदाई दी गई। पारम्परिक ढोल नगाड़ों और शहनाई की अंतिम विदाई की धुन के साथ शव यात्रा निकाली गई।

दिवंगत के घर से महज लगभग ग्यारह सौ गज की दूरी पर स्थित पंचाडू पहाड़ की तलहटी में स्थित ठेकाकोचा नाला के मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पुर्व दिवंगत शिबू सोरेन के मां सहित परिवार के अन्य दिवंगतों का नेमरा में हीं अंतिम संस्कार किया गया था। सुख दु:ख हर घड़ी में शिबू सोरेन अपने परिवार और गांव वालों के साथ खड़े रहे। वे अपने गांव की मिट्टी को कभी नहीं भूले।

यही कारण है कि हर सुख दु:ख कार्यों में वे अपने पैतृक गांव नेमरा आते रहते थे। वर्ष 1992 में जब शिबू सोरेन की माताजी का निधन हुआ था, तब वे माताजी के शव को दिल्ली से नेमरा लेकर आए थे और अंतिम संस्कार किया था। ज्यादातर रहिवासी व् राज्यवासी तब से ही यह जानने लगे कि गुरुजी का पैतृक गांव नेमरा है। उससे पहले उनके नेमरा में पैतृक गांव होने की चर्चाएं होती रहती थी, क्योंकि उन्होंने अपना ज्यादातर राजनीतिक जीवन दुमका तथा बोकारो में बिताया था।

माँ के बाद अपने चारों भाई दिवंगत राजाराम सोरेन, शंकर सोरेन, लालू सोरेन, पुत्र दुर्गा सोरेन सहित परिवार के अन्य दिवंगतों का उन्होंने नेमरा में अंतिम संस्कार किया था। वहीं सभी की शादी, मुंडन, कुल पूजन सभी में उन्होंने अपनी भागीदारी नेमरा पहुँचकर दिखाई। उनके अंतिम संस्कार में झारखंड सरकार के दर्जनभर मंत्री, विधायक, कई सांसद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पुर्व मुख्यमंत्री सह आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, बेरमो विधायक कुमार जयमंगल, गोमिया के पुर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो आदि शामिल होकर शव को कंधा दिया तथा अंतेष्ठी में शामिल हुए।

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