प्रभावित गांव में सरकार टीम भेजकर इलाज कराएं-गीता कोड़ा
प्रहरी संवाददाता/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum District) के हद में सारंडा के छोटानागरा पंचायत अंतर्गत जोजोगुटू गांव में फैली बीमारी की मुख्य वजह अचानक मलेरिया विस्फोट अथवा मलेरिया आउट ऑफ ब्रेक होना है। उक्त बातें जिला सर्विलांस सह वीबीडी प्रभारी डॉ संजय कुजूर ने बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि जो मौतें हुईं, उसमें तीन मौतें उच्च बुखार की वजह से जो संभवतः मलेरिया की वजह से हो सकती है। मृतक की मलेरिया जांच नहीं हुई थी। दो मौत मनोहरपुर व गुवा अस्पताल में हुई जो अलग-अलग बीमारी की वजह से हुई। जोजोगुटू में 14 जुलाई को आयोजित चिकित्सा शिविर में 252 मरीजों का इलाज किया गया।
इसमें 114 मरीजों की मलेरिया जांच की गई, जिसमें 23 मलेरिया संक्रमित पाये गये हैं। दो बच्चों को मनोहरपुर अस्पताल बेहतर इलाज हेतु भेजा गया है। मनोहरपुर सीएचसी प्रभारी डॉ कन्हैया लाल उरांव को निर्देश दिया गया है कि वे मलेरिया प्रभावित तमाम गांवों में मेडिकल टीम प्रतिदिन भेजकर बुखार से पीड़ित लोगों को चिन्हित करें और उनकी मलेरिया जांच कर उचित दवा दें। गंभीर मरीजों को तत्काल मनोहरपुर अस्पताल भेजें।
उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीणों को मच्छरदानी दी गई है, जिसका वे इस्तेमाल करें। पानी को उबाल कर पीयें। अंधविश्वास का सहारा न लेकर चिकित्सक से सम्पर्क करें। इस क्षेत्र में दूषित व लाल पानी का इस्तेमाल भी विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने का बड़ा कारण है।
एमपीडब्लू व एएनएम भी मलेरिया की जांच कर जरुरी दवा देने में सक्षम हैं। इस दौरान टाटा स्टील नोवामुंडी अस्पताल के चिकित्सक डॉ तापस षाड़ंगी, डॉ दिनेश कुमार, मनोहरपुर अस्पताल के सीएचसी प्रभारी डॉ कन्हैया लाल उरांव, डॉ अनिल कुमार, सदर अस्पताल के डॉ अजय कुमार, फार्मासिस्ट रौशन कुमार आदि मौजूद थे।
जोजोगुटू घटना की खबर पाकर जोजोगुटू गांव पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एवं सांसद गीता कोड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जोजोगुटू व आसपास गांवों में सात लोगों की मौत काफी दुःखद है। ऐसी घटना नहीं होनी चाहिये। यह पूरी तरह से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा है।
ऐसी घटना 3-4 साल पहले भी हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सतर्क नहीं था। उन्होंने कहा कि झारखंड में चिकित्सक की भारी कमी है। राज्य सरकार इसका रोना न रोये, क्योंकि चिकित्सकों की कमी से संबंधित समस्या को दूर करने का काम भी झारखंड सरकार का है।
सारंडा का छोटानागरा पंचायत सेल की किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, गुवा व चिडि़या तथा टीएसएलपीएल खदान से घिरा है। खदानों का लाल पानी नदी-नालों को पूरी तरह से लाल व प्रदूषित कर दिया है।
जिसका पानी पीकर ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। बाईहातु में करोड़ों की लागत से बना पेयजल आपूर्ति योजना भी भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ गया है। यहां पानी को फिल्टर कर सप्लाई करने के बजाय नदी का लाल पानी सीधे सप्लाई किया जा रहा है। यहां के चापाकलों से भी दूषित व बदबू भरा पानी निकलता है, जिस कारण रहिवासी चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड (DMFT Found) से अरबों रुपये खर्च हो रहा है। लेकिन सारंडा के रहिवासियों का स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। सारंडा के छोटानागरा जैसे क्षेत्र में स्थायी डाक्टर व एम्बुलेंस नहीं होना शर्म की बात है। रहिवासी खराब व्यवस्था व जागरुकता के अभाव में अंधविश्वास का सहारा लेने को मजबूर हैं।
छोटानागरा पंचायत का बहदा गांव में सड़क निर्माण हेतु चार बार उपायुक्त को कहा गया, लेकिन आज तक कोई कार्य नहीं हुआ। सारंडा एक्शन प्लान की सभी सड़के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर टूट गई। ठेकेदार को जब गलत कार्य करने से ग्रामीण रोकते हैं तो उन्हें नक्सली धमकी के आरोप में फंसाने का भय दिखाया जाता है।
सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि वे उपायुक्त से डीएमएफटी फंड से सारंडा समेत अन्य सुदूरवर्ती गांवों में चिकित्सक, एम्बुलेंस आदि तमाम सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग करेंगे।
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