रामकथा में भगवान राम के राज्याभिषेक की चर्चा

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। पेटरवार प्रखंड के हद में अंगवाली में आयोजित रामकथा में भगवान राम के राज्याभिषेक की चर्चा की गई। जिसमें भगवान राम के 14 वर्षो की वनवास का वर्णन किया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक से भक्तिमय हुआ पेटरवार का अंगवाली गांव। आगंतुक प्रवक्ताओं ने प्रवचन प्रस्थान किए।

बीते 12 मार्च से अंगवाली स्थित धर्म-संस्थान मैथान टुंगरी में प्रारंभ श्रीराम चरित मानस नवान्ह पारायण महायज्ञ के नौवें दिन 20 मार्च को पाठ के दौरान भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक विधिवत किया गया। इस अवसर पर समिति की ओर से ब्यास मंच सहित पूरे आयोजन स्थल को दुल्हन की तरह सजाया गया था।

यहां के प्रायः सभी मुहल्ले के हजारों की संख्या में पुरुष-महिलाएं, बुजुर्ग, युवक, युवतियां, बच्चे आदि संपूर्ण कथा तक डटे रहे। भक्तजनों ने भगवान श्रीराम के प्रति आस्था को प्रदर्शित किया।

यज्ञ के संस्थापक गौरबाबा को समिति की ओर से गुरु वशिष्ठ की उपाधि दी गई, जिन्होंने श्रीराम सहित सभी भाइयों को तिलक लगाकर राज्याभिषेक की अनुष्ठान पूरी की। ब्यास मंच पर ब्यास अनिल पाठक एवं समूह, अनुराधा सरस्वती एवं वादक टीम सहित फुसरो की चर्चित महिला चिकित्सक डॉ रविंद्र उषा सिंह उपस्थित थीं, जो गायन एवं वाद्य यंत्रों की झंकार पर खूब नाची, थिरकीं।

उन्होंने आचार्यों को वस्त्र देकर सम्मानित किया। श्रद्धालु ग्रामीण भी जय श्रीराम के जयकारे के साथ झूमते रहे, मानो अंगवाली अयोध्या बन गया हो।

इस अवसर पर युवकों द्वारा पटाखे फोड़े गए। अबीर गुलाल एक दूसरे को लगाए गगे। अंतिम रात्रि प्रवचन के दौरान अयोध्या धाम से पधारी मानस मंजरी अनुराधा सरस्वती ने राम राज्य की व्याख्या करते हुए कहा कि 14 वर्ष बनवास की अवधि पूर्ण करके प्रभु राम अयोध्या लौटे तथा आदर्श राजा के रूप में राज सिंहासन पर विराजमान हुए।

कहा कि राम चरित मानस के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक की तैयारी अयोध्या कांड में भी की गई थी, परंतु उस समय दो भाई राम और लक्ष्मण अयोध्या में थे तथा दो भाई भरत और शत्रुघ्न ननिहाल में थे। इसलिए तैयारियां रद्द हुई। परंतु उत्तर कांड में जब चारों भाई एकजुट हुए तब अयोध्या में भगवान राम का भव्य राज्याभिषेक हुआ। रामराज्य की स्थापना की गई।

अर्थात् गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा के माध्यम से दुनिया के तमाम जनों को संदेश दिया कि इस धरती पर भी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र इन चारों भाइयों में भी जबतक एकता की भावना जागृत नहीं होगी तबतक इस धरती पर भी राम राज्य की स्थापना कदापि संभव नहीं।

अतः रामकथा का मुख्य उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि आपस में बांटना। आपसी भेदभाव मिटाकर एक साथ मिलकर जीवन की सभी समस्याओं का सामना करें। इसी से रामकथा के उद्देश्य को सार्थक बनाया जा सकता है। प्रवचन के दौरान पूर्व सांसद रवींद्र कुमार पांडेय, लक्ष्मण नायक पधारे। जिन्हे समिति द्वारा सम्मानित किया गया।

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