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अंधकार से प्रकाश व् आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक पर्व है देवोत्थान एकादशी-लक्ष्मणाचार्य

श्रीनारायण के जागरण का परम मंगलमय पर्व है देवोत्थान एकादशी

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। देवोत्थान एकादशी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अज्ञान से ज्ञान की यात्रा, अंधकार से प्रकाश की ओर आरोहण और आत्मा के पुनर्जागरण का प्रतीक पर्व है।

चार महीनों तक (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक) भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा गया है। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या यज्ञ कर्म नहीं किया जाता। परंतु जब श्रीहरि जागते हैं तो सृष्टि में पुनः शुभ का प्रवाह आरंभ होता है। यह दिन भक्तों के लिए है। व्रत, उपवास, साधना और जागरण का दिन होता है। इसीलिए इसे जागृति का पर्व, मोक्ष का मार्ग बताया गया है।

उक्त बातें 31 अक्टूबर को देवोत्थान एकादशी की पूर्व संध्या पर सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने कही। उन्होंने कहा कि एक नवंबर को नौलखा मंदिर में देवोत्थान एकादशी है और उसी दिन शाम को छह बजे शाम से तुलसी -शालीग्राम विवाह भी है। उन्होंने देवोत्थान एकादशी पर कहा कि जब सृष्टि निद्रा में लीन होती है, जब धर्म सुप्त हो जाता है, तब एक पुनीत क्षण ऐसा आता है जब स्वयं सृष्टिकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा से जाग्रत होकर पुनः सृष्टि में धर्म, ज्ञान और प्रकाश का संचार करते हैं।

वह क्षण देवोत्थान एकादशी है। कहा कि भगवान के जागरण का अर्थ केवल देवता का जागरण नहीं, बल्कि सम्पूर्ण धर्म, नीति, मर्यादा और मानव चेतना का पुनर्जागरण है। पद्म पुराण (एकादशी माहात्म्य) एकादशीं उपोष्यैव सर्वपापैः प्रमुच्यते।
अश्वमेधसहस्रस्य फलमाप्नोति मानवः॥ के अनुसार जो मनुष्य एकादशी का उपवास करता है, वह हजार अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त करता है। उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। एकादशी केवल उपवास नहीं, यह चित्त की शुद्धि का साधन भी है। स्कन्द पुराण भी कहता है कि शालिग्रामं च तुलसीं च संयोगं यः करोति वै। स पापवृन्दान् नाशयति, मोक्षद्वारं च गच्छति॥ अर्थात् जो भक्त देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराते हैं, वे समस्त पापों से मुक्त होकर मोक्ष के द्वार तक पहुंचते हैं। यह प्रतीक है भक्ति और भक्ति के अधिष्ठाता के दिव्य मिलन का।

बाबा हरिहरनाथ में 2 नवंबर को तुलसी शालीग्राम विवाह महोत्सव

बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशीलचंद्र शास्त्री एवं मुख्य पुजारी पवन शास्त्री ने बताया कि श्रीबाबा हरिहरनाथ मंदिर न्यास समिति के तत्वावधान में बाबा हरिहरनाथ मंदिर प्रांगण में तुलसी शालीग्राम विवाह महोत्सव प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी आगामी 2 नवंबर कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 11 बजे से मनाया जायेगा।

 

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