अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन 4 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या सारण जिला के हद में सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मन्दिर में हजारों भक्तों ने जलाभिषेक किया। संध्याकालीन बेला में भक्तों ने बाबा हरिहरनाथ का भव्य श्रृंगार का दर्शन किया। इस अवसर पर आयोजित रुद्राभिषेक और सत्यनारायण भगवान व्रत कथा का भी श्रद्धालुओं ने श्रवण किया।
कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव के भक्तों के लिये भी पवित्र दिन माना जाता है, क्योंकि इस दिन दोनों देवताओं की एक साथ पूजा-अर्चना की जाती है। हरिहरक्षेत्र सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ हरि और हर अर्थात श्रीहरि विष्णु और देवाधिदेव भगवान शिव का संयुक्त रूप में साक्षात विग्रह स्थापित है। इस दिन भगवान हरिहरनाथ की उपासना विशेष फलदाई होता है।
उपर्युक्त बातें हरिहरनाथ मन्दिर से नन्द बाबा ने बताया। उन्होंने बताया कि इस साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगभग सौ साल के बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन दीपदान और विष्णु पूजा का खास महत्व रहता है। इस दिन को देव दिवाली भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का महत्व बढ़ जाता है।
इस अवसर पर हरिहर क्षेत्र सोनपुर के विश्व प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मन्दिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान रखते हुए सम्पूर्ण व्यवस्था की गई। बाबा के जलाभिषेक और जलढरी के लिए अरघा लगाया गया। ज्ञात हो कि जलाभिषेक के लिए अरघा एक प्रणाली है जो शिवलिंग पर जल अर्पित करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करती है। यह एक प्रकार का पाइप या चैनल होता है, जिसके द्वारा भक्त आसानी से और व्यवस्थित तरीके से शिवलिंग पर जल और अन्य सामग्री चढ़ा पाते हैं, जिससे भीड़ का प्रबंधन आसान होता है।
यह भक्त द्वारा अर्पित जल को एक निश्चित रास्ते से शिवलिंग पर गिरने में सुविधाजनक है और यह मंदिर प्रशासन के लिए भक्तों की सुविधा सुनिश्चित करने और भीड़ को व्यवस्थित करने में मदद करता है। भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए, अरघा के साथ कतारबद्ध तरीके से जलाभिषेक कराया जा रहा है। ज्ञात हो कि, मंदिर के छत पर मेला कंट्रोल रूम कार्यरत है, जहां से मंदिर सहित सभी घाटों पर निगरानी रखी जा रही है।
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