अशोक कुमार/बगोदर (गिरिडीह)। सावन के दूसरे सोमवारी के अवसर पर 25 जुलाई को गिरिडीह जिला (Giridih District) के हद में बगोदर स्थित हरिहर धाम मंदिर में भक्तों ने श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया। भक्तों की माने तो सावन की सोमवारी में शिव शंकर भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
बता दें कि, बगोदर प्रखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर दूर बगोदर हजारीबाग मार्ग पर हरिहर धाम मंदिर अवस्थित है। तकरीबन 25 एकड़ जमीन के उत्तरवाहिनी जमुनिया नदी के तट पर स्थित 65 फीट ऊंची शिवलिंग का शिव मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
उत्तरवाहिनी जमुना नदी में स्नान कर जल लेकर शिव भक्त मंदिर पहुंचते हैं। जहां जलाभिषेक कर भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है। हरिहर धाम मंदिर भारत का अनोखा शिव मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
हरिहर धाम की स्थापना की कथा भी कम रोचक नहीं है। हरिहर अर्थात विष्णु हर अर्थात कष्टों को हरने वाले भगवान शिव के नाम पर मंदिर का नामकरण किया गया है। पश्चिम बंगाल निवासी स्वभाव से साधु अमरनाथ मुखोपाध्याय को हरिहर धाम मंदिर की स्थापना का श्रेय जाता है। अमरनाथ मुखोपाध्याय पेशे से इंजीनियर थे।
इंजीनियरिंग की नौकरी और गृहस्थ आश्रम को त्याग कर धर्म-कर्म की इच्छा का समावेश उन्हें हुआ था। चार धाम की पैदल यात्रा पर वह पश्चिम बंगाल से निकल पड़े थे। बगोदर में यात्रा के दौरान उन्होंने पड़ाव डाला था। स्नान ध्यान के लिए एक किलोमीटर दूर उत्तरवाहिनी जमुनिया नदी पहुंचे थे। जहां की प्राकृतिक छटा और हवा उन्हें आकर्षित किया था।
कहा जाता है कि जात्रा पूरी करने के बाद अमरनाथ मुखोपाध्याय बगोदर में नदी किनारे पहुंचे और कुटिया बनाकर रहने लगे। इसी दौरान उनके मन में हरिहर धाम की स्थापना का विचार आया। सर्वप्रथम राधा कृष्ण मंदिर की स्थापना उन्होंने की। शिव मंदिर की परिकल्पना को सर जमीन पर उतारने में जुट गए और 1988 में 65 फीट ऊंची सीलिंग का शिव मंदिर अस्तित्व में लाया।
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